राजौरी : जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज अचानक बेहद खतरनाक हो गया है। पहाड़ी इलाकों में बादल फटने और उसके बाद आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। स्थानीय जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में करीब 14 अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान राजौरी जिले में हुआ, जहां बाढ़ की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई। कई घर, वाहन और सार्वजनिक ढांचे भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।
रात में फटा बादल, देखते ही देखते मची तबाही
राजौरी जिले के थन्नामंडी सब-डिविजन की पंचायत के पास बुधवार को बादल फटने की घटना हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक 19 अगस्त की रात करीब 3 बजे से 3:45 बजे के बीच अचानक बादल फटा और देखते ही देखते पानी का तेज बहाव गांवों और निचले इलाकों में घुस गया। नालों में अचानक पानी बढ़ने से लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि कई गाड़ियां पानी में बह गईं। कई रिहायशी मकान या तो पूरी तरह बह गए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। राजौरी की राजधानी पंचायत में भी भारी तबाही की सूचना है। खेती और कृषि योग्य जमीन पानी के साथ बह गई, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण कई रास्ते बाधित हो गए।
बस स्टैंड और घर भी बाढ़ में बहे
अचानक आई बाढ़ का सबसे भयावह असर राजौरी जिले के कई हिस्सों में देखने को मिला। एक प्रमुख बस स्टैंड पूरी तरह बाढ़ में बह गया। कई वाहनों के पानी में बहने की बात सामने आई है। छह लोगों के एक परिवार का घर भी पूरी तरह बह गया। घर और सामान गंवाने के बाद परिवार को एक सरकारी स्कूल में शरण लेनी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इलाके में इस तरह की अचानक और भयावह बाढ़ पहले कभी नहीं देखी थी। तेज बारिश, बादल फटने और पहाड़ी इलाकों में लगातार बढ़ रहे भूस्खलन के खतरे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
घर के अंदर कैद रहे लोग, बाहर निकलना भी मुश्किल
स्थानीय युवक अब्दुल गनी ने बताया कि 19 अगस्त की रात हालात इतने खराब थे कि लोग घरों के अंदर ही फंस गए थे। नदी की दहाड़ और बड़े-बड़े पत्थरों के टकराने की आवाज सुनाई दे रही थी। किसी तरह परिवार के लोग घर से बाहर निकल पाए। उनका अपना घर भी पूरी तरह बह गया।
14 जगह बादल फटने से बढ़ी चिंता
लगातार सामने आ रही बादल फटने की घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में खतरे की घंटी बजा दी है। स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 14 स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें, मकान, वाहन और कृषि भूमि प्रभावित हुई है। प्रशासन और राहत एजेंसियों के सामने प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने तथा संपर्क मार्ग बहाल करने की बड़ी चुनौती है। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अचानक बढ़ते जलस्तर से दूर रहने की अपील की जा रही है।



