
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ जौ बोया जाता है, जिसे ज्वारा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह ज्वारा मां दुर्गा की कृपा, सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। पूरे नौ दिनों तक श्रद्धालु अखंड ज्योति जलाकर माता का आह्वान करते हैं और नियमित रूप से पूजा-पाठ करते हैं।
मान्यता है कि इस दौरान की गई पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
नवरात्रि के अंतिम दिन शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ज्वारा विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विसर्जन यात्राएं निकालीं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और “जय माता दी” के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ ज्वारा का विसर्जन किया और मां दुर्गा से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।