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जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड स्थित लखाईडीह गांव में आयुर्वेद और हर्बल खेती को लेकर नई उम्मीद जगी है। आयुर्वेदश्री हर्बल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. कर्ण राजहंस ने गांव का दौरा कर यहां की प्राकृतिक संपदा और जड़ी-बूटियों की संभावनाओं का गहन अध्ययन किया।
इस पहल की शुरुआत तब हुई जब लखाईडीह के ग्राम प्रधान कान्हु राम टुडू ने नई दिल्ली में आयुर्वेद और हर्बल क्षेत्र के विशेषज्ञों व उद्यमियों के साथ बैठक कर उन्हें गांव आने का आमंत्रण दिया। इसी कड़ी में डॉ. राजहंस का यह दौरा संभव हो पाया।
दौरे के दौरान उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों का निरीक्षण किया और उनके संरक्षण के साथ वैज्ञानिक शोध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि इन वन संपदाओं का सही तरीके से संरक्षण और संवर्धन किया जाए, तो यह क्षेत्र देश के हर्बल मानचित्र पर अपनी खास पहचान बना सकता है।
डॉ. राजहंस ने कहा कि जिस तरह देश के अन्य राज्यों में “हर्बल क्रांति” ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, उसी तरह झारखंड भी अपनी प्राकृतिक संपदाओं के बल पर आत्मनिर्भर बन सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जो इलाका कभी नक्सल प्रभावित “रेड जोन” के रूप में जाना जाता था, वह अब पूरी तरह सुरक्षित है और विकास के नए अवसरों के लिए तैयार है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हर्बल खेती, प्रसंस्करण और विपणन की सुनियोजित व्यवस्था से स्थानीय आदिवासी और मूलवासी समुदायों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। इससे आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ पलायन की समस्या पर भी रोक लगेगी।
लखाईडीह गांव में शुरू हुई यह पहल अब क्षेत्र के विकास की नई उम्मीद बनकर उभर रही है, जो आने वाले समय में पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकती है।
रिपोर्ट: बिनोद केसरी, जमशेदपुर

 

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