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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका व इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz के बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिकी वित्तीय संस्था JPMorgan Chase की हालिया रिपोर्ट ने अप्रैल महीने को तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी हमलों के चलते इस अहम समुद्री मार्ग से तेल का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। इसका असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है, जहां तेल की कीमतों के साथ-साथ उसकी उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
सबसे ज्यादा असर एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया पर पड़ने की आशंका है। आम तौर पर फारस की खाड़ी से तेल की खेप एशिया तक पहुंचने में 10 से 20 दिन लगते हैं, लेकिन 28 फरवरी के बाद से कोई नया टैंकर इस मार्ग से नहीं निकला है। ऐसे में पहले से भेजे गए शिपमेंट लगभग खत्म हो चुके हैं और अब आपूर्ति पर दबाव साफ दिखने लगा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में तेल निर्यात में करीब 41 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट अब सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजार में तेल की वास्तविक उपलब्धता भी बड़ी समस्या बन चुकी है। अप्रैल की शुरुआत से इसका असर अफ्रीकी देशों में भी दिखने लगेगा। केन्या में ईंधन की कमी के शुरुआती संकेत मिल चुके हैं, जबकि तंजानिया के पास फिलहाल पर्याप्त स्टॉक है।
यूरोप में इस संकट का असर अप्रैल के मध्य तक देखने को मिल सकता है। हालांकि, यूरोपीय देशों के पास बेहतर स्टॉक और वैकल्पिक आपूर्ति के रास्ते मौजूद हैं, जिससे वे कुछ हद तक इस संकट का सामना कर सकते हैं।
अमेरिका पर इसका असर सबसे बाद में पड़ेगा, क्योंकि खाड़ी देशों से वहां तेल पहुंचने में 35 से 45 दिन का समय लगता है। हालांकि JPMorgan Chase के अनुसार, अमेरिका का घरेलू उत्पादन मजबूत है, लेकिन आम लोगों को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर कैलिफोर्निया जैसे इलाके इस आपूर्ति संकट के प्रति ज्यादा संवेदनशील बताए गए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक खतरा बन चुका है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर आम जनता और वैश्विक बाजार पर पड़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अप्रैल महीने और तेल आपूर्ति की स्थिति पर टिकी हुई है।

 

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