
नई दिल्ली : भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान से एक बार फिर सनसनीखेज दावा सामने आया है। पाकिस्तानी धर्मगुरु नसीर मदनी ने सार्वजनिक मंच से कहा है कि लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद ने जम्मू-कश्मीर में करीब 10 हजार आतंकियों को भेजा था। 14 अगस्त को बहावलनगर में एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन के कार्यक्रम में दिए गए इस कथित बयान ने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और कश्मीर में आतंकवाद के पुराने सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
धर्मगुरु के बयान से मचा हड़कंप
नसीर मदनी का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब भारत लगातार पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकी गतिविधियों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। मंच से किए गए दावे में हाफिज सईद को कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ से जोड़ते हुए बड़ी संख्या का जिक्र किया गया।
हालांकि, 10 हजार आतंकियों को कश्मीर भेजे जाने के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल नसीर मदनी के सार्वजनिक बयान के रूप में ही देखा जा रहा है।
कौन है हाफिज सईद?
हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े प्रमुख आरोपियों में से एक रहा है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उसे आतंकवाद से जोड़कर कार्रवाई कर चुकी हैं।
लश्कर-ए-तैयबा का नाम वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमले में भी सामने आया था। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी। भारत की जांच एजेंसियों ने हाफिज सईद को इस हमले की साजिश से जुड़े प्रमुख लोगों में शामिल बताया था।
26/11 से पहलगाम तक चर्चा में रहा नाम
हाफिज सईद का नाम सिर्फ मुंबई हमले तक सीमित नहीं रहा। भारत में हुए कई आतंकी हमलों की जांच के दौरान उसका नाम और लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क सामने आता रहा है।
अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भी हाफिज सईद का नाम जांच के संदर्भ में चर्चा में आया। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां लगातार पड़ताल करती रही हैं।
पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठे सवाल
नसीर मदनी के कथित बयान ने पाकिस्तान की धरती से भारत के खिलाफ संचालित आतंकवादी नेटवर्क को लेकर पुराने सवालों को फिर हवा दे दी है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों को वहां से समर्थन और सुरक्षित ठिकाने मिलते रहे हैं।
अगर 10 हजार आतंकियों से जुड़ा यह दावा भविष्य में विश्वसनीय स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट होता है, तो यह कश्मीर में दशकों से चले आ रहे सीमा पार आतंकवाद के पैमाने को समझने के लिए बेहद गंभीर जानकारी होगी।
दावा बड़ा, लेकिन पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 10 हजार आतंकियों वाली संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए नसीर मदनी के बयान को सीधे प्रमाणित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा। फिर भी पाकिस्तान के सार्वजनिक मंच से हाफिज सईद का नाम लेकर कश्मीर में आतंकियों को भेजने का दावा सामने आना भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद के मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है।

