
मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने उसके संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल तेज कर दी है। एटीएस को जफर के मोबाइल फोन से कई अहम साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। इन्हीं के आधार पर अब उससे जुड़े अन्य युवकों और संदिग्ध संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
मोबाइल से मिले साक्ष्यों ने बढ़ाया जांच का दायरा
जफर के फेसबुक और वाट्सएप अकाउंट का पूरा रिकॉर्ड भी एटीएस ने खंगाला है। जांच में सामने आया है कि उसके संपर्क मेरठ के अलावा हापुड़, सहारनपुर और बुलंदशहर तक बताए जा रहे हैं। जफर ने इन क्षेत्रों के युवाओं का एक वाट्सएप ग्रुप बना रखा था। अब एजेंसी ग्रुप से जुड़े लोगों की भूमिका और उनके बीच हुई बातचीत की पड़ताल कर रही है। एजेंसियों की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि जफर के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और उनका आपसी नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था।
आतंकियों को शेल्टर और फंड जुटाने की तैयारी का आरोप
जफर पर आरोप है कि वह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी नेटवर्क के लिए भारत में मदद का इंतजाम करने की तैयारी कर रहा था। जांच में मस्जिद के नाम पर चंदा एकत्र करने और उसे आतंकी संगठन तक पहुंचाने की कथित योजना की भी बात सामने आई है।
एटीएस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं चंदाछ जुटाने के नाम पर किसी तरह की फंडिंग गतिविधि तो नहीं चल रही थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मसूद अजहर के साहित्य से प्रभावित होने की बात
जांच में यह भी सामने आया है कि जफर कथित तौर पर मसूद अजहर से संबंधित साहित्य पढ़ता था। उसके पास मिली एक किताब में मसूद अजहर के तिहाड़ जेल में रहने का उल्लेख मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस साहित्य का जफर की विचारधारा पर कितना प्रभाव पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, जफर कथित तौर पर खुद भी कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होकर जिहादी गतिविधियों की ओर बढ़ना चाहता था।
2017 में पढ़ाई के लिए आया था मेरठ
जफर वर्ष 2017 में पढ़ाई के लिए मेरठ आया था। कोतवाली थाना क्षेत्र के एक मदरसे में पढ़ाई के दौरान उसके फेल होने की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद वह बिहार लौट गया। वर्ष 2022 में वह दोबारा मेरठ आया और मस्जिद में रहने लगा।
बाद में वह हापुड़ के शेरपुर स्थित मस्जिद का इमाम बना। इसी दौरान उसके जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में आने का आरोप है। अब एटीएस उसके पुराने संपर्कों और गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
बहनोई और अन्य युवकों पर भी नजर
जफर के बुलंदशहर निवासी बहनोई पर भी निगरानी रखी जा रही है। एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि जफर की गतिविधियों की जानकारी उसके करीबियों को थी या नहीं।
जफर से जुड़े अन्य युवकों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। एजेंसी को उम्मीद है कि मोबाइल और सोशल मीडिया से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियां सामने आ सकती हैं।
मदरसों के सत्यापन की मांग
जफर की गिरफ्तारी के बाद मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के पुलिस सत्यापन की मांग भी उठी है। अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने जफर के मामले में मदरसा दारुल उलूम की भूमिका की जांच और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल एटीएस की जांच जारी है। जफर के मोबाइल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में और लोगों से पूछताछ या गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

