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जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर करनी सेना के नेता हिमांशु सिंह की हत्या के बाद शहर में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, कदमा, एमजीएम और मानगो थाना क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इस बीच पुलिस ने मंगलवार देर रात कड़ी सुरक्षा के बीच हिमांशु के शव का पोस्टमार्टम कराया, लेकिन परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है।
देर रात करीब 3 बजे पुलिस हिमांशु के शव को टीएमएच से पोस्टमार्टम हाउस लेकर पहुंची, जहां भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पोस्टमार्टम कराया गया। प्रशासन की ओर से परिजनों को कई बार बुलाया गया, लेकिन वे पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद भी शव वहीं रखा गया है। परिजनों और करनी सेना का कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी का एनकाउंटर नहीं होगा, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात दोनों जिलों के उपायुक्त भी हिमांशु के घर पहुंचे और परिजनों से पोस्टमार्टम व शव लेने का आग्रह किया। लेकिन परिवार अपने फैसले पर अड़ा रहा। बुधवार सुबह भी पुलिस और प्रशासन की टीम परिजनों को मनाने पहुंची, हालांकि कोई सहमति नहीं बन सकी। परिजनों का आरोप है कि उन्हें बिना जानकारी दिए पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा दिया। इधर, शहर में दोबारा तनाव और प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए धालभूम अनुमंडल प्रशासन ने छह थाना क्षेत्रों में धारा 163 लागू कर दी है। आदेश के अनुसार किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, घेराव, जुलूस और पुतला दहन पर रोक रहेगी। तलवार, लाठी-डंडा, तीर-धनुष सहित किसी भी प्रकार के हथियार लेकर सार्वजनिक स्थानों पर निकलने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश 1 जुलाई से अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल अब भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और उस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। शहर में जोनल आईजी, कोल्हान डीआईजी समेत वरिष्ठ अधिकारी कैंप कर रहे हैं और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, इस मामले में अब तक दो आईपीएस अधिकारियों, एक इंस्पेक्टर, दो एएसआई और एक आरक्षी सहित छह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। शहर में इस हत्याकांड को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है और पुलिस की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

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