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जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में ब्रेन मलेरिया (पीएफ) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को पांच वर्षीय बच्ची और एक 50 वर्षीय महिला की मौत के बाद जिले में इस वर्ष ब्रेन मलेरिया से मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए विशेष जांच अभियान में 12,518 लोगों की जांच की गई, जिसमें 128 नए मरीजों की पुष्टि हुई। इनमें 98 मरीज ब्रेन मलेरिया (प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम), 28 सामान्य मलेरिया (पीवी) और दो मिक्स संक्रमण के मरीज शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र अब भी पोटका है, जहां अकेले 44 नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा डुमरिया में 20, घाटशिला में 19 और मुसाबनी में 15 मरीजों की पुष्टि हुई। पटमदा, धालभूमगढ़, चाकुलिया, बहरागोड़ा, जुगसलाई और बोड़ाम समेत अन्य प्रखंडों में भी संक्रमण के मामले सामने आए हैं। पोटका के केंदुआ और हरिणा पंचायत संक्रमण के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। पोटका में लगातार बढ़ रहे मरीजों के कारण पोटका सीएचसी प्रभारी डॉ रजनी महतो को निलंबित कर दिया गया है। उनपर कर्तव्य में लापरवाही बरतने और स्थिति को नियंत्रित करने में विफल होने का आरोप लगा है। डॉ सुशांत सीट को पोटका सीएचसी का नया प्रभारी बनाया गया है।इधर, बढ़ते संक्रमण को देखते हुए उपायुक्त ने अगले चार दिनों में एक लाख लोगों की मलेरिया जांच कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर जांच, दवा वितरण, फॉगिंग और जागरूकता अभियान चला रही है। साथ ही ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निगरानी तेज करने और अभियान की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ने से अधिक मरीज सामने आ रहे हैं, लेकिन संक्रमण की श्रृंखला अभी पूरी तरह नहीं टूटी है। बारिश के मौसम में जलजमाव, झाड़ियां और खुले स्थानों पर जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बना रहे हैं। ऐसे में केवल दवा वितरण से नहीं, बल्कि साफ-सफाई और मच्छर नियंत्रण के प्रभावी उपायों से ही संक्रमण पर काबू पाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं। मच्छरदानी का उपयोग करें, घर और आसपास पानी जमा न होने दें तथा चिकित्सकों की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लें, ताकि ब्रेन मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव हो सके।

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