
जमशेदपुर : झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जंगलों में लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने रहे एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश ने जंगल छोड़ दिया है। खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव के बीच आकाश ने सीपीआई (माओवादी) की पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के अपने सशस्त्र दस्ते को भंग कर संगठन से दूरी बना ली है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, अगस्त के मध्य में आकाश दलमा रेंज के जंगलों से सामान्य कपड़ों में बाहर निकला और फिलहाल किसी शहर में शरण लिए हुए है। झारखंड और पश्चिम बंगाल की सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
साथियों के आत्मसमर्पण से बढ़ा दबाव
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में दस्ते के प्रमुख सदस्यों की गिरफ्तारी, मुठभेड़ों में हुई मौतों और लगातार आत्मसमर्पण से आकाश पर संगठनात्मक और सुरक्षात्मक दबाव काफी बढ़ गया था।
आकाश के बेहद करीबी माने जाने वाले रामदास माड़िया उर्फ सचिन, उसकी पत्नी मीता उर्फ नयनतारा तथा मदन महतो की पत्नी गौरी उर्फ बुल्लू के आत्मसमर्पण से सुरक्षा एजेंसियों को माओवादी नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। इसके बाद संगठन के नेटवर्क पर शिकंजा और कस गया।
आखिरकार जंगल छोड़ने से पहले आकाश ने बचे हुए साथियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी और अपने सशस्त्र दस्ते को औपचारिक रूप से भंग कर दिया।
किशनजी के बाद संभाली थी कमान
आकाश का माओवादी आंदोलन से जुड़ाव 1980 के दशक में उसके कॉलेज के दिनों से माना जाता है। वर्ष 2011 में शीर्ष माओवादी नेता किशनजी की मुठभेड़ में मौत के बाद आकाश को पश्चिम बंगाल का चौथा राज्य सचिव बनाया गया था।
वर्ष 2018 तक उसने पूर्वी सिंहभूम और बाद में पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा तथा बंगाल-झारखंड सीमा क्षेत्र में संगठन को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की हत्या समेत कई प्रमुख माओवादी घटनाओं में उसके दस्ते की संलिप्तता की जांच होती रही है।
जंगल छोड़ने के बाद भी खतरा खत्म नहीं
हालांकि आकाश के जंगल छोड़ने की खबर सामने आने के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादी नेटवर्क के लिए अंतिम झटका नहीं मान रही हैं। झारखंड-बंगाल सीमा से सटे दलमा के जंगलों में अभी भी माओवादी गतिविधियों की सूचनाएं सामने आती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, दलमा क्षेत्र में दो माओवादी सदस्यों के हथियारों के साथ छिपे होने की भी सूचना है। इनमें मंगल सिंह सरदार और उसकी पत्नी मिताली मुर्मू के नाम सामने आए हैं।
सुरक्षा एजेंसियां अब आकाश के अगले कदम पर भी नजर रख रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि वह आत्मसमर्पण कर सकता है या संगठन को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर सकता है। फिलहाल उसकी गतिविधियों और उसके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।











