
नई दिल्ली : पनीर भारतीय खानपान का बेहद लोकप्रिय हिस्सा है, लेकिन बाजार में बिकने वाला हर पनीर आपकी सेहत के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं। देश के कई राज्यों में एनालॉग यानी गैर-डेयरी पनीर की बिक्री और आपूर्ति को लेकर कार्रवाई तेज हुई है। जांच के दौरान कई जगह नमूने फेल होने और बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर पकड़े जाने के मामले सामने आए हैं। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच असली और नकली पनीर की पहचान को लेकर चिंता बढ़ गई है।
दूध से नहीं बनता एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर देखने में सामान्य पनीर जैसा ही दिखाई देता है, लेकिन इसे पारंपरिक तरीके से दूध से तैयार नहीं किया जाता। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसमें वनस्पति तेल या वनस्पति फैट के साथ सोया या मटर से मिलने वाले प्रोटीन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा स्टार्च, स्टेबलाइजर, चूना, पाउडर वाला दूध और अन्य सामग्री भी मिलाई जा सकती है।
ऐसे उत्पाद को यदि बिना उचित लेबलिंग के सामान्य पनीर के तौर पर बेचा जाए, तो उपभोक्ता के लिए यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि वह वास्तव में क्या खरीद रहा है।
घर पर ऐसे पहचानें असली और नकली पनीर
पनीर खरीदते समय सबसे पहले पैकेट का लेबल और सामग्री जरूर देखें। यदि उत्पाद पर सोया प्रोटीन, मटर प्रोटीन या वनस्पति फैट जैसी सामग्री प्रमुख रूप से लिखी है, तो वह पारंपरिक दूध से बना पनीर नहीं हो सकता।
रिपोर्ट में बताए गए कुछ घरेलू संकेतों के अनुसार, पनीर को दबाने पर उसकी बनावट और गर्म पानी में डालने के बाद आने वाली गंध पर ध्यान दिया जा सकता है। प्राकृतिक दूध से बने पनीर में दूध जैसी गंध आने की संभावना होती है, जबकि संदिग्ध उत्पाद में अलग तरह की गंध महसूस हो सकती है।
हालांकि केवल घरेलू जांच को निर्णायक प्रमाण नहीं मानना चाहिए। किसी उत्पाद के असली-नकली होने की पुष्टि के लिए खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला की जांच सबसे भरोसेमंद तरीका है।
आयोडीन टेस्ट से भी लगाया जा सकता है संकेत
रिपोर्ट में आयोडीन टेस्ट का भी उल्लेख किया गया है। पनीर के एक छोटे हिस्से पर आयोडीन डालने के बाद रंग में बदलाव होने पर उसमें स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है। लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि ऐसा घरेलू परीक्षण खाद्य सुरक्षा जांच का विकल्प नहीं है।
कई राज्यों में कार्रवाई, हजारों किलो पनीर जब्त
एनालॉग पनीर को लेकर कई राज्यों में अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में इसके उत्पादन, बिक्री या भंडारण पर कार्रवाई की गई है।
हरियाणा में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पनीर के 285 नमूने लिए जाने और बड़ी संख्या में नमूनों के मानकों पर खरा नहीं उतरने की बात रिपोर्ट में कही गई है। विभाग के अनुसार बाजार में बिकने वाले पनीर में बड़ी मात्रा में मिलावट का अनुमान भी सामने आया है।
मध्य प्रदेश में 10,835 किलो पनीर जब्त
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर रोक के बीच अभियान चलाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई के दौरान 10,835 किलो पनीर जब्त किया गया।
छत्तीसगढ़ में भी कार्रवाई के बाद दूध पाउडर और पाम ऑयल से तैयार उत्पाद को ‘मलाई पनीर’ के नाम पर बेचने की शिकायतें सामने आईं। अभियान के दौरान संदिग्ध सामग्री नष्ट करने और लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
दिल्ली समेत बड़े बाजारों तक पहुंच
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में दूसरे राज्यों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पनीर पहुंचने का अनुमान है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों से इसकी आपूर्ति होने की जानकारी सामने आई है। उत्तर प्रदेश में भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी संख्या में छापे मारकर नमूने लिए और कुछ नमूनों को असुरक्षित पाया।
यानी पनीर खरीदते समय सिर्फ उसकी सफेदी और कीमत देखकर फैसला न करें। पैकेट पर लिखी सामग्री, निर्माता की जानकारी, लाइसेंस/लेबल और उत्पाद की गुणवत्ता की जांच करना ज्यादा जरूरी है। खुला पनीर खरीदते समय भी विश्वसनीय विक्रेता से ही खरीदारी करना बेहतर है।











