
नई दिल्ली : दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद जारी नई दिल्ली घोषणापत्र को भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। सम्मेलन में आतंकवाद, सीमा पार आतंकी गतिविधियों, पश्चिमी देशों की एकतरफा व्यापार नीतियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव समेत कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनी। खास तौर पर पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहलगाम हमले पर कड़ा रुख, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता
घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा की गई। साथ ही आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों और सीमा पार आतंकी आवाजाही के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प लिया गया। ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने, आतंकियों के वित्तपोषण के नेटवर्क को तोड़ने और सुरक्षित पनाहगाहों पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।
घोषणापत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराने की बात कही गई है।
पश्चिमी देशों को टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर संदेश
व्यापार के मोर्चे पर भी ब्रिक्स ने पश्चिमी देशों को संदेश दिया है। घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों की आलोचना की गई। यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे जलवायु आधारित व्यापार उपायों पर भी चिंता जताई गई है।
ब्रिक्स ने ऐसी व्यापार नीतियों को विकासशील देशों के लिए नुकसानदेह बताते हुए वैश्विक व्यापार व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत दोहराई। संगठन ने ऐसी व्यवस्था की मांग की, जिसमें उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को अधिक महत्व मिले और वैश्विक बाजारों तक उनकी समान पहुंच सुनिश्चित हो।
पश्चिम एशिया में संयम और बातचीत की अपील
पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव पर भी ब्रिक्स ने चिंता जताई। सदस्य देशों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव को लेकर भी चिंता जाहिर की गई।
घोषणापत्र में विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने तथा क्षेत्र में स्थायी शांति के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
पहली बार फिलिस्तीन मुद्दे को प्रमुखता
फिलिस्तीन के मुद्दे को भी घोषणापत्र में प्रमुख स्थान दिया गया। गाजा में जारी हिंसा पर चिंता जताते हुए फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया गया। ब्रिक्स ने 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना के समर्थन को दोहराया।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर जोर
ब्रिक्स ने आपसी व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। सीमा पार भुगतान और भुगतान प्रणालियों की पारस्परिक अनुकूलता पर काम जारी रखने की बात कही गई।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्राथमिकताओं से लेकर वैश्विक व्यापार सुधार और पश्चिम एशिया में शांति तक कई मुद्दों पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता की झलक दिखाई दी।











