
नई दिल्ली : ब्रिक्स समिट 2026 में भारत की अध्यक्षता के दौरान आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और वैश्विक संस्थाओं में सुधार को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनने की उम्मीद है। समिट के दौरान भारत को लेकर 50 से अधिक ठोस और व्यावहारिक परिणाम सामने आने की बात कही गई है। इनमें आतंकवाद से मुकाबला, वैश्विक शासन में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करना और सहयोग बढ़ाना प्रमुख हैं।
आतंकवाद पर भारत के रुख को मिला समर्थन
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लिए समिट के प्रमुख परिणामों में आतंकवाद की कड़ी निंदा और उसके सभी स्वरूपों से निपटने का संकल्प शामिल है। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सख्त और एकजुट कार्रवाई की मांग करता रहा है। ऐसे में ब्रिक्स मंच से इस मुद्दे पर व्यापक सहमति भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को समर्थन मिलने की बात भी सामने आई है। यदि यह समर्थन व्यापक सहमति में बदलता है, तो वैश्विक शासन व्यवस्था में भारत की भूमिका को लेकर इसे बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।
50 से ज्यादा ठोस नतीजों पर नजर
समिट से जुड़े विवरण के अनुसार, भारत की अध्यक्षता के दौरान चार प्रमुख स्तंभों पर काम हुआ है। इनमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता शामिल हैं। इन क्षेत्रों में 50 से अधिक ठोस परिणाम और व्यावहारिक पहल सामने आने की उम्मीद जताई गई है।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स को केवल सरकारों के बीच संवाद का मंच बनाने के बजाय व्यापक भागीदारी वाला मंच बनाने पर भी जोर दिया। विभिन्न क्षेत्रों में मंत्रियों और एजेंसियों के प्रमुखों की बैठकों के जरिए साझा सहमति तैयार करने की कोशिश की गई।
पश्चिम एशिया पर मतभेद के बावजूद उम्मीद
हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच मतभेदों के कारण कुछ मुद्दों पर स्पष्टता नहीं बन पाई है। यह भी सवाल बना हुआ है कि शिखर सम्मेलन किसी साझा घोषणा-पत्र के साथ समाप्त होगा या नहीं।
इसके बावजूद सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत की अध्यक्षता को सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। एक अधिकारी के हवाले से कहा गया कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले देशों के बीच सालभर में करीब 400 बैठकों के जरिए भारत ने साझा सहमति बनाने और सभी पक्षों को साथ लाने की क्षमता दिखाई है।
भारत की बढ़ी वैश्विक भूमिका
भारत का मानना है कि ब्रिक्स को संवाद और रचनात्मक सहयोग का मजबूत मंच बनाकर वैश्विक व्यवस्था में बेहतर संतुलन कायम किया जा सकता है। अध्यक्षता के दौरान केंद्र, राज्य, उद्योग, शिक्षा जगत, युवा और नागरिक समाज को भी विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ने की कोशिश की गई।
ऐसे में ब्रिक्स समिट 2026 भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक और नेतृत्व क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर बनकर सामने आया है।











