
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देश के प्रत्येक टोल प्लाजा पर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है। इस व्यवस्था को टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 112 से जोड़ने की तैयारी है, जिससे सूचना मिलते ही नजदीकी एंबुलेंस घटनास्थल के लिए रवाना की जा सके।
राज्य सरकारों को दी जाएगी जिम्मेदारी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर उपलब्ध एंबुलेंस का संचालन संबंधित राज्य सरकारें करेंगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार न केवल एंबुलेंस उपलब्ध कराएगी, बल्कि उसके संचालन पर आने वाले खर्च को वहन करने की योजना भी बना रही है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार का उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति तक शुरुआती सहायता जल्द पहुंचाना है। दुर्घटना के बाद का पहला घंटा उपचार की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में टोल प्लाजा आधारित एंबुलेंस नेटवर्क से अस्पताल पहुंचने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
देशभर के लगभग 1200 टोल प्लाजा होंगे शामिल
देश में करीब 1200 टोल प्लाजा बताए गए हैं। फिलहाल इनमें लगभग 500 एंबुलेंस तैनात हैं। नई योजना लागू होने के बाद शेष टोल प्लाजा को भी चरणबद्ध तरीके से एंबुलेंस सुविधा से जोड़ा जाएगा। मंत्रालय का लक्ष्य है कि हर एंबुलेंस चौबीसों घंटे सेवा के लिए तैयार रहे और आवश्यकता पड़ते ही घटनास्थल की ओर रवाना हो। जिन राजमार्गों पर मल्टीलेन फ्री-फ्लो प्रणाली के कारण पारंपरिक टोल गेट मौजूद नहीं हैं, वहां एंबुलेंस की तैनाती यातायात, दूरी और स्थानीय जरूरतों के आधार पर राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित की जाएगी।
112 से जुड़ेगा पूरा आपातकालीन नेटवर्क
इस सेवा को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम के टोल-फ्री नंबर 112 से एकीकृत किया जाएगा। दुर्घटना की सूचना मिलने पर नियंत्रण कक्ष नजदीकी एंबुलेंस से संपर्क करेगा। एनएचएआई के नियंत्रण और समन्वय तंत्र से भी एंबुलेंस को जोड़ने की योजना है, ताकि वाहन का स्थान पता लगाने तथा उसे दुर्घटनास्थल तक भेजने में देरी न हो।
दस मिनट में मदद पहुंचाने पर जोर
संसद के पिछले सत्र में मंत्रालय ने कहा था कि यदि राज्य सरकारें अपने स्तर पर एंबुलेंस चलाते हुए दुर्घटना की सूचना मिलने के करीब दस मिनट के भीतर सेवा पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें, तो केंद्र सहयोग देने के लिए तैयार है। अब इस दिशा में काम तेज किया गया है। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर घायल यात्रियों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।











