
जमशेदपुर : जमशेदपुर शहर में फिजियोथेरेपी के नाम पर चल रहे कई सेंटरों की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि शहर में कुछ ऐसे सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट के बजाय अयोग्य या गैर-मेडिकल पृष्ठभूमि वाले लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे सेंटरों की जांच कराने की बात कही है।
90 सेंटर, 35 से 40 पर सवाल
इंडियन फिजियोथेरेपी एसोसिएशन के अनुसार जमशेदपुर में करीब 90 फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित हैं। इनमें से लगभग 35 से 40 सेंटरों के संचालन, चिकित्सकों की योग्यता और वैध रजिस्ट्रेशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि कुछ जगहों पर नियमों का पालन किए बिना मरीजों को उपचार दिया जा रहा है।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर
मानगो-पारडीह रोड स्थित एक फिजियोथेरेपी सेंटर की जांच के दौरान मौके पर कोई प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट मौजूद नहीं मिला। इसके बावजूद वहां पांच मरीजों का इलाज किया जा रहा था। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ लोग केवल एक्यूप्रेशर की डिग्री के आधार पर फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित कर रहे हैं।
बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस पर सख्त कार्रवाई का दावा
झारखंड राज्य फिजियोथेरेपी परिषद अधिनियम के तहत फिजियोथेरेपी प्रैक्टिस के लिए काउंसिल में पंजीकरण आवश्यक बताया गया है। नियमों के मुताबिक रजिस्टर में दर्ज व्यक्ति के अलावा कोई अन्य व्यक्ति फिजियोथेरेपी का अभ्यास नहीं कर सकता।
इसके अलावा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत सेंटरों में आवश्यक योग्य स्टाफ, न्यूनतम मानक और मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड का पालन जरूरी है।
गलत इलाज से बढ़ सकता है मरीजों का जोखिम
फिजियोथेरेपी केवल मशीन लगाने या सामान्य कसरत कराने तक सीमित नहीं है। स्ट्रोक, पैरालिसिस, नसों की बीमारी, रीढ़ की हड्डी की समस्या और सर्जरी के बाद पुनर्वास में सही तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। गलत तकनीक या अनुचित इलेक्ट्रोथेरेपी से मरीज की समस्या गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग चलाएगा विशेष जांच अभियान
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने जल्द ही शहर के फिजियोथेरेपी सेंटरों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही है। वहीं आईएपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार के अनुसार अवैध तरीके से संचालित सेंटरों की सूची तैयार की जा रही है, जिसे सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग को सौंपा जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि जांच में कितने सेंटर नियमों पर खरे उतरते हैं और कितनों पर कार्रवाई होती है?











