10 साल का इंतजार खत्म! अब 2 घंटे में मुंबई से अहमदाबाद, 350 Kmph की रफ्तार से दौड़ेगी बुलेट ट्रे

नई दिल्ली : मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब अपने सबसे अहम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। 2017 में शुरू हुआ यह मेगा प्रोजेक्ट करीब एक दशक बाद रफ्तार पकड़ चुका है। पहले चरण में ट्रेन चलाने की तैयारी तेज है और 15 अगस्त 2027 के आसपास शुरुआती सेवा शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
600 नहीं, 508 KM के कॉरिडोर पर दौड़ेगी ट्रेन
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 508 किलोमीटर है। मौजूदा समय में दोनों शहरों के बीच सफर में कई घंटे लगते हैं, लेकिन बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यह यात्रा करीब 2 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य है।
350 KM प्रति घंटे तक पहुंचेगी रफ्तार
बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे बताई जा रही है, जबकि परिचालन गति करीब 320 किमी प्रति घंटे रहने की योजना है। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय नाटकीय रूप से घट जाएगा।
15 अगस्त 2027 से शुरू हो सकता है पहला चरण
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अगस्त 2027 के मौके पर मुंबई-अहमदाबाद ट्रैक के पहले चरण में बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है। शुरुआती चरण में सूरत से बिलिमोरा के बीच सेवा शुरू किए जाने की संभावना बताई गई है।
मुंबई से अहमदाबाद तक 12 स्टेशनों पर ठहरेगी ट्रेन
पूरे कॉरिडोर पर प्रमुख स्टेशनों में मुंबई (BKC), ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। यानी रास्ते में कई बड़े शहर हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से सीधे जुड़ेंगे।
जापानी शिंकानसेन तकनीक से तैयार हो रहा प्रोजेक्ट
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में जापानी शिंकानसेन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत के लिए यह हाई-स्पीड रेल के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।
देश में सिर्फ एक नहीं, 7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की तैयारी
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा देश में कई अन्य हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे रूट शामिल हैं। यानी आने वाले वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रेन यात्रा की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
2017 में शुरू हुआ सफर, अब लॉन्च का इंतजार
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत 2017 में हुई थी। जमीन, निर्माण और तकनीकी चुनौतियों के कारण परियोजना में समय लगा और लागत भी बढ़ी। अब ट्रैक और स्टेशनों का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है।
करीब 10 साल के इंतजार के बाद अगर तय समय पर सेवा शुरू होती है, तो मुंबई-अहमदाबाद के बीच सफर भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।











