दुनिया का नक्शा बदल गया! अफ्रीका अब दिखेगा और बड़ा, यूरोप-अमेरिका का घटेगा आकार; भारत ने किया समर्थ

नई दिल्ली : दुनिया को हम बचपन से जिस नक्शे पर देखते आए हैं, उसमें अब बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को ज्यादा वास्तविक भौगोलिक आकार में दिखाने की दिशा में एक प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला है। इस प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसका विरोध किया।
आखिर पुराने नक्शे में क्या है गड़बड़ी?
दुनिया में लंबे समय से मर्केटर प्रोजेक्शन का इस्तेमाल होता रहा है। 16वीं सदी में तैयार किए गए इस प्रोजेक्शन का इस्तेमाल खास तौर पर समुद्री नेविगेशन के लिए किया गया था। इसकी खासियत यह थी कि समुद्री रास्तों को समझना आसान होता था।
लेकिन इसकी एक बड़ी कमी भी है। जैसे-जैसे कोई क्षेत्र भूमध्य रेखा से दूर जाता है, नक्शे पर उसका आकार वास्तविकता की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है।
यही वजह है कि ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्र नक्शे पर बेहद विशाल नजर आते हैं, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल के मामले में वह अफ्रीका से काफी छोटा है।
नए नक्शे में अफ्रीका दिखेगा ज्यादा वास्तविक
प्रस्ताव में ‘इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन’ जैसे समान-क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसका मकसद दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों और क्षेत्रों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाना है।
इस बदलाव के बाद अफ्रीका का आकार पारंपरिक मर्केटर नक्शे की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देगा। वहीं उत्तरी अमेरिका और यूरोप जैसे क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे नजर आ सकते हैं।
यह बदलाव सिर्फ नक्शे की शक्ल बदलने तक सीमित नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ सकता है कि बच्चे स्कूलों में दुनिया के भूगोल को किस तरह समझते हैं।
भारत ने क्यों किया समर्थन?
भारत ने प्रस्ताव का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने समान क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन के महत्व पर जोर दिया। उनका तर्क था कि ऐसे नक्शे महाद्वीपों और क्षेत्रीय भू-भाग के वास्तविक आकार और क्षेत्रफल को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने में मदद करते हैं।
भारत का समर्थन ऐसे समय में आया है जब दुनिया में नक्शों के जरिए देशों और महाद्वीपों की भौगोलिक समझ को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है।
क्या मर्केटर मैप अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
नहीं। संयुक्त राष्ट्र का यह कदम मर्केटर प्रोजेक्शन को तत्काल खत्म करने का आदेश नहीं है। अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग नक्शा प्रोजेक्शन उपयोगी होते हैं।
समुद्री नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में मर्केटर प्रोजेक्शन की अपनी उपयोगिता बनी रह सकती है। वहीं शिक्षा, भूगोल और वैश्विक क्षेत्रफल की तुलना के लिए समान-क्षेत्रफल वाले नक्शे ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं।
अमेरिका ने किया विरोध
इस प्रस्ताव को भारी अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों की बड़ी संख्या इसे वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कदम बनाती है।
यानी आने वाले समय में दुनिया को देखने का हमारा तरीका बदल सकता है, नक्शे में अफ्रीका पहले से कहीं बड़ा और यूरोप-अमेरिका अपेक्षाकृत छोटे दिखाई दे सकते हैं।











