
नई दिल्ली: नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद चल रहे राहत एवं बचाव अभियान के बीच अब एक नई चुनौती सामने आ गई है। प्रभावित इलाकों से अब तक 579 से अधिक शव बरामद किए जाने की सूचना है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शवों की बताई जा रही है, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। लंबे समय तक अंतिम संस्कार न होने तथा सीमित भंडारण व्यवस्था के कारण प्रशासन को संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका सता रही है।
पहचान नहीं होने से अंतिम संस्कार में देरी
आपदा प्रभावित जिलों में सुरक्षाकर्मी और राहत दल लगातार लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। मलबा हटाए जाने के साथ अलग-अलग स्थानों से शव मिलने का सिलसिला जारी है। पहचान नहीं हो पाने के कारण कई शवों का अंतिम संस्कार रुका हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, अज्ञात शवों के डीएनए नमूने सुरक्षित रखने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, ताकि भविष्य में परिजनों की पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
चितवन में 178 शव मिलने का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले चितवन जिले से अब तक 178 शव बरामद किए गए हैं। बड़ी संख्या में शव पहुंचने से स्थानीय प्रशासन के सामने उन्हें सुरक्षित रखने की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण कुछ शवों को एक सरकारी कार्यालय में रखने की व्यवस्था करनी पड़ी है।प्रशासन का कहना है कि राहत अभियान जारी रहने के कारण यह संख्या आगे और बढ़ सकती है। ऐसे में शवों की पहचान, परिजनों तक सूचना पहुंचाना और सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।
दुर्गंध और संक्रमण ने बढ़ाई चिंता
कई शव खराब अवस्था में मिलने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में दुर्गंध फैलने लगी है। प्रशासन को आशंका है कि उचित और त्वरित प्रबंधन नहीं किया गया तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसी खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शवों को पहचान होने तक निर्धारित तापमान वाले सुरक्षित स्थानों पर रखने की जरूरत बताई है। हालांकि अचानक बढ़ी संख्या के मुकाबले उपलब्ध कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेशन क्षमता कम पड़ रही है। बताया गया है कि धादिंग में मिले कुछ शवों को बेहतर रखरखाव के लिए काठमांडू और पोखरा स्थानांतरित किया गया है।
केंद्र और जिलों के बीच समन्वय तेज
नेपाल का गृह मंत्रालय प्रभावित जिलों के प्रशासन के साथ मिलकर शवों के शीघ्र प्रबंधन की रणनीति तैयार कर रहा है। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी जैसे जिलों से लगातार शव मिलने की जानकारी सामने आ रही है। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि अंतिम संस्कार स्थानीय स्तर पर कराया जाए या अज्ञात शवों को काठमांडू लाया जाए।
फिलहाल प्रशासन का पूरा जोर डीएनए नमूने सुरक्षित रखने, शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराने और प्रभावित बस्तियों में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करके किसी संभावित बीमारी को फैलने से रोकने पर है।


