
जमशेदपुर : सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत गर्भवती महिलाओं को समय पर सुरक्षित प्रसव सुविधा उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पोटका-राजनगर क्षेत्र के रिचितदुका गांव का एक मामला इन दावों पर सवाल खड़ा करता है। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद गर्भवती शांति हांसदा को परिजन एमजीएम अस्पताल लेकर निकले, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही गाड़ी के अंदर उसका प्रसव हो गया। राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।
एंबुलेंस के बजाय 1000 रुपये में किराये पर ली गाड़ी
शांति के पति विधान हांसदा के स्वजनों के अनुसार मंगलवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद परिवार ने गांव की सहिया से संपर्क किया। शांति की सास मदीन हांसदा ने बताया कि राजनगर से एमजीएम अस्पताल ले जाने के लिए सहिया से संपर्क करने पर पैसे मांगे गए।
इसके बाद परिजनों ने खुद गाड़ी की व्यवस्था की और करीब 1000 रुपये किराये पर वाहन लेकर शांति को एमजीएम अस्पताल के लिए रवाना हुए। परिवार के सामने तत्काल अस्पताल पहुंचाने की चुनौती थी। रास्ते में प्रसव पीड़ा तेज होने के बाद करनडीह से पहले ही गाड़ी के अंदर बच्चे का जन्म हो गया।
अचानक प्रसव से मची अफरा-तफरी
चलती गाड़ी में अचानक प्रसव होने से परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। किसी तरह मां और नवजात को संभालने के बाद परिवार दोनों को लेकर एमजीएम अस्पताल पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने मां और बच्चे की जांच की। जांच के बाद दोनों की स्थिति सामान्य बताई गई।
मां और नवजात के सुरक्षित होने से परिवार ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्र से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
सदर अस्पताल क्यों नहीं गए?
शांति की सास मदीन हांसदा से जब पूछा गया कि करनडीह के बाद सदर अस्पताल पड़ता है, फिर वहां जाने के बजाय सीधे एमजीएम अस्पताल क्यों पहुंचे, तो उन्होंने बताया कि उन्हें एमजीएम अस्पताल ही आना था, इसलिए सीधे एमजीएम चले आए।
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा तक तत्काल क्यों नहीं ले जाया गया और परिवार को खुद किराये की गाड़ी की व्यवस्था क्यों करनी पड़ी।
कुछ दिन पहले भी टेंपो में हुआ था प्रसव
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी एमजीएम अस्पताल आने वाली एक गर्भवती महिला का रास्ते में टेंपो के अंदर ही प्रसव हो गया था। लगातार ऐसे मामले सामने आने से गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर सुरक्षित परिवहन और प्रसव सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात करती है, तो प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को अस्पताल पहुंचने के लिए निजी स्तर पर वाहन की व्यवस्था और करीब एक हजार रुपये खर्च करने की स्थिति क्यों बन रही है? मां और बच्चा सुरक्षित हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत जरूर बताती हैं।


