
जमशेदपुर : झारखंड में लगातार हो रही मूसलधार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। जमशेदपुर में स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है। शहर से होकर गुजरने वाली खरकई नदी मंगलवार रात 10 बजे खतरे के निशान से करीब 4.50 मीटर ऊपर बह रही थी। वहीं सुवर्णरेखा नदी भी डेंजर लेवल से 1.24 मीटर ऊपर पहुंच गई। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए चांडिल डैम के 13 फाटक समेत गालूडीह बराज और ओडिशा के विभिन्न डैम-बैराज के 45 से अधिक फाटक खोलने पड़े हैं।
बागबेड़ा से कदमा तक पानी ही पानी
नदियों के उफान के साथ बैकवॉटर और उफनाए नालों ने शहर के कई निचले इलाकों में तबाही मचा दी है। बागबेड़ा, मानगो, जुगसलाई, दाईगुड्डू, भुईयांडीह और कदमा में 1000 से अधिक घरों में पानी घुस गया है। कई मकान और दुकानें जलमग्न हैं। प्रशासन ने तटीय एवं निचले इलाकों में अलर्ट जारी कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। एनडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं।
बागबेड़ा नया बस्ती में करीब 180 घरों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया है। लोग जरूरी सामान छतों और ऊंचे स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। जुगसलाई की गरीब नवाज कॉलोनी में करीब 160 घर जलमग्न हो गए हैं।
मानगो में घर-दुकान और मंदिर भी पानी में
मानगो के न्यू करीम सिटी कॉलेज लाइन के 50 से 60 घरों में पानी पहुंच गया है। ओल्ड पुरुलिया रोड के करीब 50 घर भी प्रभावित हैं। कुंवर बस्ती की करीब 65 रिहाइशी इमारतों के साथ 15 दुकानें, एक मंदिर और एक एटीएम भी पानी की चपेट में हैं। दाईगुड्डू में 100 से अधिक घरों में पानी घुस गया, जबकि कदमा शास्त्रीनगर में करीब 50 घर बाढ़ से प्रभावित हैं।
मंगलवार शाम मामूली कमी, खतरा बरकरार
मंगलवार शाम के बाद खरकई के जलस्तर में मामूली कमी दर्ज की गई, लेकिन नदी अब भी खतरे के निशान से करीब साढ़े चार मीटर ऊपर बह रही है। इससे तटीय क्षेत्रों में चिंता बनी हुई है।
कोल्हान के ग्रामीण इलाकों में भी असर
घाटशिला और बहरागोड़ा क्षेत्र में सुवर्णरेखा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कोईमा गांव के डूबने की सूचना है। ईंट-भट्ठों के साथ खेत-खलिहान भी पानी में डूब गए हैं। कई स्थानों पर पुलिया के ऊपर से पानी बहने के कारण गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
सितंबर में पूरी हो सकती है मानसून की कमी
झारखंड में जून से सितंबर तक सामान्य मानसूनी बारिश 1022 मिलीमीटर होती है। एक सितंबर तक 807.1 एमएम के मुकाबले 785.7 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब तीन प्रतिशत कम है। सितंबर में यदि 237 एमएम बारिश हो जाती है तो मानसून का कोटा पूरा हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार सितंबर में सामान्य बारिश 224 एमएम रहती है।
कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 54 प्रतिशत, लातेहार में 23 प्रतिशत, सरायकेला में 18 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 14 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। रांची में 10 प्रतिशत, सिमडेगा में नौ प्रतिशत और खूंटी में छह प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर पाकुड़, गुमला, बोकारो, देवघर, कोडरमा, गोड्डा, हजारीबाग, पलामू, धनबाद, दुमका, गढ़वा और अन्य जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है।
रेल परिचालन भी प्रभावित
पलामू में गढ़वा रोड-सोननगर रेलखंड पर माली रसूलपुर गांव के पास आहर टूटने से मंगलवार को रेल पटरी पर करीब तीन फीट पानी आ गया। इससे एक लाइन पर लगभग दो घंटे तक परिचालन प्रभावित रहा। वहीं कोडरमा के नाथगंज-बरकटवा रेलखंड में टनल नंबर एक के पास पहाड़ का मलबा गिरने से रेल यातायात प्रभावित हुआ।


