आपदा में जान बचाने के बाद भी बड़ी चुनौती, संपत्ति और संसाधनों को बचाना जरूरी : संतोष कुमा

सिद्धार्थ पाण्डेय, चाईबासा : आपदा के दौरान लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन राहत एवं बचाव कार्य के बाद क्षतिग्रस्त भवनों, रेलवे संपत्तियों, उपकरणों और महत्वपूर्ण संसाधनों को सुरक्षित करना भी उतना ही आवश्यक है। आपदा के बाद नुकसान को नियंत्रित करने और उपलब्ध संसाधनों को सुरक्षित रखने में साल्वेज सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह बातें राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित रेल सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने जोनल प्रशिक्षण संस्थान (ZRTI), सिनी में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं।
तीन रेल जोन से पहुंचे 415 रेलकर्मी
ईस्ट कोस्ट रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे एवं दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 10 मंडलों से कुल 415 रेलकर्मियों को आपदा प्रबंधन और साल्वेज सेवा के विभिन्न पहलुओं पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षणार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण कार्यक्रम को तीन सत्रों में संचालित किया गया। बिलासपुर, विशाखापट्टनम, नागपुर, चक्रधरपुर, रायगढ़, रांची, आद्रा, खुर्दा, रायपुर और खड़गपुर मंडल से रेलकर्मी इसमें शामिल हुए।
प्रार्थना सभा के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान संस्थान के प्राचार्य, उप प्राचार्य, मुख्य अनुदेशक एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अतिथि व्याख्याता संतोष कुमार ने रेलकर्मियों को आपदा के दौरान और उसके बाद अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं की विस्तार से जानकारी दी।
भूकंप-बाढ़ से लेकर रेल दुर्घटना तक की दी जानकारी
संतोष कुमार ने कहा कि भूकंप, बाढ़, चक्रवात और आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं के अलावा मानव निर्मित दुर्घटनाओं का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बुनियादी ढांचे, संपत्ति और जरूरी संसाधनों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव के बाद प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करना और क्षतिग्रस्त संसाधनों को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखना जरूरी है।
उन्होंने साल्वेज सेवा को आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि सही योजना, समय पर कार्रवाई और बेहतर टीमवर्क से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे महत्वपूर्ण उपकरणों एवं संपत्तियों को बचाने के साथ संक्रमण, महामारी और अन्य द्वितीयक खतरों को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
गोल्डन आवर में कार्रवाई और CPR का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान रेलकर्मियों को गोल्डन आवर में त्वरित कार्रवाई, प्राथमिक सुरक्षा उपाय, बाढ़ एवं भूकंप के दौरान बचाव प्रक्रिया, एंबुलेंस संचालन, ट्रायेज, प्राथमिक चिकित्सा, फर्स्ट एड और सीपीआर की जानकारी दी गई। इसके अलावा सर्पदंश एवं डॉग बाइट में प्राथमिक उपचार, अग्निशमन और विभिन्न रेस्क्यू तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया गया।
वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों में स्थिति का आकलन, उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग, त्वरित निर्णय लेने और टीम के साथ समन्वय बनाकर काम करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण को सरल एवं व्यावहारिक बनाने के लिए पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया गया।
स्टेशन मैनेजर से लोको पायलट तक हुए शामिल
प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर, प्रोबेशनरी स्टेशन मैनेजर, प्रोबेशनरी पैसेंजर ट्रेन मैनेजर, प्रोबेशनरी लोको पायलट सहित अन्य रेलकर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षणार्थियों ने संतोष कुमार के व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि विषयों को सरल भाषा और उदाहरणों के माध्यम से समझाने से आपदा की स्थिति में घबराहट के बजाय सही निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई करने का आत्मविश्वास बढ़ा है।
समापन अवसर पर संस्थान के मुख्य अनुदेशक ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल सभी अधिकारियों, प्रशिक्षकों एवं रेलकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से आयोजित करने पर जोर दिया।












