
– बारिश के बीच शहर के अलग-अलग इलाकों में बढ़ा खतरा, छोटा गोविंदपुर से मानगो और डिमना रोड तक मिले संदिग्ध मरीज
– डेंगू के साथ जापानी इंसेफेलाइटिस के दो और एच1एन1 का एक संदिग्ध मरीज मिला, मलेरिया अभियान में जांच जारी
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला अभी मलेरिया के खिलाफ चल रहे अभियान से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि बरसात के साथ अब डेंगू ने भी चिंता बढ़ानी शुरू कर दी है। शहर में पिछले पांच दिनों के अंदर डेंगू के दो मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अब तक आठ संदिग्ध मरीज सामने आ चुके हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। खासकर बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है।
तीन दिन पहले डेंगू के पांच संदिग्ध मरीज सामने आए। इनमें छोटा गोविंदपुर, गुरुद्वारा रोड मानगो, जवाहर नगर, मानगो और डिमना रोड मानगो के मरीज शामिल हैं। सभी का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। शुरुआती जांच में डेंगू जैसे लक्षण मिलने के बाद अस्पतालों ने मरीजों के नमूने जिला सर्विलांस विभाग को भेजे हैं।
लक्षण मिले, लेकिन रिपोर्ट के बाद ही होगी पुष्टि
जिला सर्विलांस विभाग ने सभी संदिग्ध मरीजों के नमूने जांच के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब भेजे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित मरीज वास्तव में डेंगू से संक्रमित हैं या नहीं।
फिलहाल शहर में दो मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वहीं आठ संदिग्ध मरीजों के नमूने जांच के दायरे में हैं। स्वास्थ्य विभाग की नजर अब उन इलाकों पर है जहां से नए संदिग्ध मरीज सामने आ रहे हैं।
डेंगू के साथ जेई और स्वाइन फ्लू ने भी बढ़ाई चिंता
बरसात के मौसम में केवल डेंगू ही स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती नहीं बन रहा है। जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के भी दो संदिग्ध मरीज मिले हैं। दोनों मरीज परसुडीह और मानगो क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनके नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
इसके अलावा एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू का एक संदिग्ध मरीज भी सामने आया है। एच1एन1 इन्फ्लुएंजा-ए वायरस से होने वाला फ्लू है। इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। संदिग्ध मरीज का नमूना भी जांच के लिए भेजा गया है।
इस तरह देखा जाए तो बारिश के मौसम में पूर्वी सिंहभूम में एक साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग के लिए निगरानी, समय पर जांच और मरीजों की पहचान बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
मलेरिया अभी भी बना हुआ है बड़ी चुनौती
दूसरी ओर जिले में मलेरिया के खिलाफ अभियान भी लगातार जारी है। चार दिन पहले विभिन्न प्रखंडों में 4,695 लोगों की मलेरिया जांच की गई। जांच में कुल 35 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई। इनमें पीएफ मलेरिया के 26, पीवी मलेरिया के आठ और मिक्स मलेरिया का एक मरीज शामिल है।
मलेरिया के मामले में पोटका क्षेत्र अभी भी सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। यहां स्वास्थ्य विभाग की टीमें विशेष जांच, निगरानी और जागरूकता अभियान चला रही हैं। प्रभावित इलाकों में लगातार जांच कर मरीजों की पहचान करने और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
बारिश के साथ बढ़ा मच्छरों का खतरा
स्वास्थ्य विभाग के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती मच्छरजनित बीमारियों को नियंत्रित करने की है। बारिश के बाद जमा होने वाला पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। ऐसे में मलेरिया के साथ डेंगू के मामले बढ़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पूर्वी सिंहभूम में पहले से ही मलेरिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर जांच और निगरानी अभियान चल रहा है। अब डेंगू के संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासियों के लिए भी जरूरी है कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें तथा बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मलेरिया के खिलाफ जारी जंग के बीच क्या डेंगू अब जमशेदपुर में नया खतरा बनने की ओर बढ़ रहा है? आने वाले दिनों की जांच रिपोर्ट इस सवाल का जवाब देगी।

