
जमशेदपुर : देश में छात्र आत्महत्या के बढ़ते मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में देश में छात्र आत्महत्या के मामलों में 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके उलट झारखंड के जमशेदपुर में पिछले 11 वर्षों के आंकड़े राहत देने वाली तस्वीर पेश करते हैं। जीवन आत्महत्या रोकथाम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में यहां छात्र आत्महत्या के मामलों में 54 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, विद्यार्थियों से संवाद और स्कूल-कॉलेजों में चलाए जा रहे रोकथाम कार्यक्रमों को इस बदलाव की अहम वजह माना जा रहा है।
2020 के बाद कुल आत्महत्या के मामलों में भी गिरावट
जमशेदपुर में आत्महत्या के मामलों के वार्षिक आंकड़ों पर नजर डालें तो 2020 में सबसे अधिक 258 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2021 में 255, 2022 में 206, 2023 में 207, 2024 में 181 और 2025 में यह संख्या घटकर 175 रह गई। यानी 2020 के मुकाबले 2025 में कुल मामलों में करीब 32 प्रतिशत की कमी आई है।
यह गिरावट ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब देश स्तर पर विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
पूरे 2025 में 19 छात्र मामले, 2026 के आठ महीने में 16
केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जमशेदपुर और आदित्यपुर क्षेत्र में कुल 175 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए थे। इनमें 19 मामले विद्यार्थियों से संबंधित थे। वहीं 2026 में जनवरी से अगस्त तक कुल 108 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 16 छात्र शामिल हैं।
हालांकि 2026 का वर्ष अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए पूरे वर्ष के आंकड़े के साथ इसकी सीधी तुलना करना उचित नहीं होगा। फिर भी आठ महीने में छात्र मामलों का 16 तक पहुंचना चिंता का संकेत जरूर है।
45 साल तक की उम्र वाले 85 प्रतिशत से ज्यादा मामले
2026 के जनवरी से अगस्त तक दर्ज 108 मामलों में 92 मामले 45 वर्ष तक की उम्र के लोगों से संबंधित हैं। यानी कुल मामलों का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा इसी आयु वर्ग से जुड़ा है। इससे युवाओं और कामकाजी आयु वर्ग में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समय रहते हस्तक्षेप और संवाद की जरूरत सामने आती है।
वहीं इसी अवधि में पुरुषों से जुड़े 72 मामले और महिलाओं से जुड़े 36 मामले दर्ज किए गए हैं।
47 मामलों में कारण अब भी स्पष्ट नहीं
रिपोर्ट में आत्महत्या के पीछे दर्ज कारणों को भी अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। 2026 के आठ महीनों में 47 मामले अज्ञात कारण की श्रेणी में हैं। वहीं परिवार से जुड़ी समस्या 18 मामलों में दर्ज की गई है।
यह आंकड़ा बताता है कि आत्महत्या की घटनाओं के पीछे वास्तविक कारणों को समझना और संकट में मौजूद व्यक्ति तक समय पर पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती है।
स्कूलों में बढ़ा मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
जीवन आत्महत्या रोकथाम केंद्र की ओर से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक परेशानियों के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल-कॉलेजों में कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। 29 अगस्त को आरएमएस स्कूल, खुटाडीह में प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें 17 स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
एनिमेटेड स्टोरी बोर्ड, स्टोरी राइटिंग, मेंटल हेल्थ सुपरहीरो और ‘इमोशंस इन द क्लासरूम’ जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को समझने और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने का संदेश दिया गया।
सितंबर में 14 जागरूकता रैलियों की तैयारी
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितंबर के अवसर पर पूरे सितंबर में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। संस्था की ओर से विद्यार्थियों के बीच 14 जागरूकता रैलियां आयोजित करने की योजना है। रैलियों में प्ले-कार्ड, स्लोगन और नुक्कड़ नाटक के जरिए मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम का संदेश दिया जा रहा है।
अब तक डीबीएमएस करियर एकेडमी, गोविंद विद्यालय चोना गोविंदपुर और डीबीएमएस इंग्लिश स्कूल में रैलियां आयोजित की जा चुकी हैं।
10 सितंबर को होगा मुख्य कार्यक्रम
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर 10 सितंबर को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में शाम छह बजे मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दौरान संस्था की ओर से वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही आत्महत्या रोकथाम और जागरूकता के क्षेत्र में सहयोग करने वाले स्कूलों, संस्थानों और लोगों को सम्मानित किया जाएगा।
जमशेदपुर के 11 साल के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य पर लगातार संवाद, विद्यार्थियों तक पहुंच और जागरूकता अभियान को मजबूत करना आत्महत्या रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।











