
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान को लेकर बड़ा फैसला साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अब उनके भतीजों को बसपा संगठन में छोटे-बड़े किसी भी पद पर राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही मायावती ने भविष्य की जिम्मेदारी के लिए अपनी भतीजी और आनंद कुमार की बेटी कुमारी दीपिका आनंद का नाम सामने रखा है।
परिवारवाद की चर्चा के बीच मायावती का बड़ा संदेश
मायावती ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पार्टी संस्थापक कांशीराम की शिष्या होने के नाते वह परिवारवाद के खिलाफ रही हैं। उन्होंने सफाई दी कि अविवाहित होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा, क्योंकि वह लंबे समय से उनकी देखभाल के साथ पार्टी की जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं।
मायावती के मुताबिक, अब आनंद कुमार के दोनों बेटे अपने परिवार और निजी जीवन में आगे बढ़ चुके हैं। ऐसे में पार्टी को लेकर उन्होंने अपना अंतिम फैसला स्पष्ट कर दिया है।
आकाश को पहले बनाया था उत्तराधिकारी, फिर हटाया
मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकार लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया था। हालांकि बाद में उनकी जिम्मेदारी वापस ले ली गई और उन्हें पार्टी से बाहर भी किया गया।
कुछ समय बाद आकाश की फिर पार्टी में वापसी हुई। वहीं हाल में ईशान आनंद को भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। लेकिन अब मायावती ने दोनों भतीजों को पार्टी में किसी पद पर राजनीतिक भूमिका देने से इनकार कर दिया है।
‘जरूरत पड़ी तो दीपिका संभाल सकती हैं जिम्मेदारी’
मायावती ने कहा कि यदि भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद की जरूरत पड़ती है, तो उनकी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद आगे आ सकती हैं। उनके अनुसार दीपिका की ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखते हुए पार्टी में जरूरत के मुताबिक उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दीपिका के तैयार न होने की स्थिति में आनंद कुमार की आम सहमति से बसपा के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
लंदन में कानून की पढ़ाई कर रही हैं दीपिका
कुमारी दीपिका आनंद की उम्र करीब 22 वर्ष बताई गई है और वह लंदन में कानून की पढ़ाई कर रही हैं। वह आकाश और ईशान से छोटी हैं। फिलहाल दीपिका सक्रिय राजनीति से दूर हैं और बसपा के राजनीतिक मंचों तथा कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी भी नजर नहीं आती।
फिर भी मायावती के बयान के बाद पार्टी के भीतर उनके भविष्य की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में दीपिका बसपा की नई पीढ़ी का चेहरा बन सकती हैं?
जेनेरेशन-जी को 50 फीसदी हिस्सेदारी का दावा
मायावती ने संगठन में जेनेरेशन-जी की भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही है। उन्होंने बताया कि संगठन में युवाओं की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत तक करने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। आगामी चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ और युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इस पूरे फैसले को मायावती की ओर से परिवारवाद की बहस को खत्म करने और बसपा में अगली पीढ़ी के नेतृत्व का रास्ता तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।











