
रांची : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एमबीबीएस के नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई औपचारिक नामांकन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही प्रारंभ कर दी गई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के निर्देशों के अनुसार संस्थान में 15 सितंबर से फाउंडेशन कोर्स संचालित किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के साथ अस्पताल की कार्यप्रणाली, समय प्रबंधन और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार की जानकारी दी जा रही है। रिम्स में एमबीबीएस की कुल 250 सीटें हैं। अब तक करीब 180 छात्र-छात्राओं ने नामांकन लेकर फाउंडेशन कोर्स में भाग लेना शुरू कर दिया है। दूसरी काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
मेडिकल पढ़ाई से पहले व्यावहारिक प्रशिक्षण
फाउंडेशन कोर्स का उद्देश्य नए विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के माहौल से परिचित कराना है। इस दौरान उन्हें अस्पताल के अलग-अलग विभागों, स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था तथा चिकित्सकीय टीम की जिम्मेदारियों के बारे में समझाया जा रहा है। विद्यार्थियों को यह भी बताया जा रहा है कि मरीजों और उनके परिजनों से किस प्रकार संवाद किया जाए। इसके अतिरिक्त समय का सही उपयोग, अनुशासन, मरीजों की स्थिति को समझना और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समन्वय बनाकर काम करना भी प्रशिक्षण का हिस्सा है। मेडिकल पेशे से जुड़ी जिम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों की प्रारंभिक जानकारी भी इस कोर्स के माध्यम से दी जा रही है।
15 सितंबर से पाठ्यक्रम शुरू करना अनिवार्य
रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिशिर कुमार के अनुसार, एनएमसी के दिशा-निर्देशों के तहत 15 सितंबर से फाउंडेशन कोर्स प्रारंभ करना जरूरी था। इसी कारण नामांकन की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने का इंतजार किए बिना कक्षाएं शुरू कर दी गईं। उन्होंने बताया कि निर्धारित समय के बाद प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को शुरुआत से यह पाठ्यक्रम करने का अवसर नहीं मिल सकेगा। हालांकि इससे उनकी एमबीबीएस की नियमित पढ़ाई नहीं रुकेगी, लेकिन वे मेडिकल कॉलेज के शुरुआती वातावरण और व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों से वंचित रह सकते हैं।
देर से आने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा असर
फाउंडेशन कोर्स में शामिल नहीं हो पाने वाले विद्यार्थियों को अस्पताल की कार्यप्रणाली, मरीजों से संवाद और चिकित्सा सेवा से जुड़ी बुनियादी बातों को बाद में समझना होगा। उन्हें ये अनुभव नियमित कक्षाओं और अस्पताल में कामकाज के दौरान प्राप्त करने पड़ सकते हैं।
बेहतर चिकित्सक तैयार करने की दिशा में पहल
मेडिकल शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती। एक बेहतर चिकित्सक बनने के लिए मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, प्रभावी संवाद और टीम के साथ काम करने की क्षमता भी जरूरी है। रिम्स का फाउंडेशन कोर्स विद्यार्थियों को इन्हीं जिम्मेदारियों के लिए शुरुआती स्तर से तैयार करने की महत्वपूर्ण पहल है।











