
- कदमा की आदिवासी महिला ने एसएसपी से की शिकायत, बोली- आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए केस डायरी में दर्ज नहीं किए गए अहम डिजिटल साक्ष्य
जमशेदपुर : कदमा की रहने वाली एक आदिवासी महिला से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर कथित तौर पर 18 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में नया मोड़ आया है। पीड़िता ने मामले के जांच अधिकारी (IO) सह सोनारी थाना के अवर निरीक्षक (एसआई) शिवम राज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि आरोपी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उसके द्वारा पुलिस को सौंपे गए अहम डिजिटल साक्ष्यों को केस डायरी में दर्ज नहीं किया गया।
फर्जी फेसबुक आईडी से संपर्क, फिर 18 लाख की ठगी
पीड़िता लक्ष्मी दुलाई की ओर से एसएसपी को दिए गए आवेदन के अनुसार, सोनारी (न्यू लाइन) निवासी अरुण कुमार ने कथित रूप से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उससे संपर्क साधा। इसके बाद बातचीत के दौरान उससे करीब 18 लाख रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है।
पीड़िता का कहना है कि जब उसने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने कथित तौर पर जातिसूचक गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी।
इस मामले में बिस्रामनगर थाना में 13 जुलाई को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और ठगी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
60 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने का आरोप
पीड़िता के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज होने के 60 दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच अधिकारी ने अब तक न तो आरोपी को गिरफ्तार किया और न ही अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
पीड़िता का दावा है कि उसके पास आरोपी के साथ हुई डिजिटल बातचीत, ऑडियो और चैट के महत्वपूर्ण प्रमाण मौजूद थे। उसने ये साक्ष्य पुलिस को पेन ड्राइव में भी उपलब्ध कराए थे।
25 अगस्त को केस डायरी में साक्ष्य दर्ज नहीं करने का आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि 25 अगस्त 2026 को केस डायरी में इन महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को दर्ज नहीं किया गया। पीड़िता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने आरोपी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसा किया।
हालांकि, ये आरोप पीड़िता की शिकायत पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच में उनकी वास्तविक भूमिका पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
गवाहों के बयान पर भी सवाल
शिकायत के मुताबिक मामले की दो प्रमुख गवाहों—गीता और सुमित्रा सिन्हा के बयान डीएसपी (हेडक्वार्टर-2) के कार्यालय में दर्ज किए जा चुके हैं। पीड़िता का आरोप है कि इसके बावजूद जांच अधिकारी केस डायरी में उनके बयान दर्ज करने में आनाकानी करते रहे और बाद में स्पीड पोस्ट के माध्यम से बयान भेजा गया।
एसएसपी से जांच अधिकारी बदलने और गिरफ्तारी की मांग
पीड़िता ने बुधवार को वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. एहतेशाम वकारीब से मुलाकात कर शिकायत सौंपी। उसने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल जांच अधिकारी को बदलने, डिजिटल साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल करने और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है।
अब शिकायत के आधार पर पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई होती है और लगाए गए आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर नजर है।











