जमशेदपुर : 734 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) फर्जीवाड़े की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। ईडी की जांच के अनुसार, गिरोह ने कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों और नौकरों की पहचान का कथित तौर पर दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां और कागजी फर्में तैयार कीं। इन फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये के फर्जी चालान और इनवॉइस जारी किए गए।
जांच के अनुसार, ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल के खिलाफ कार्रवाई के बाद कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की परतें खुलीं। ईडी का दावा है कि पिता-पुत्र ने कर्मचारियों और नौकरों के पहचान-पत्रों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्में खड़ी कीं। इनमें मेसर्स जय भोले एंटरप्राइजेज जैसी फर्म का भी उल्लेख जांच में किया गया है।
135 फर्जी कंपनियों से तैयार हुए हजारों करोड़ के बिल
ईडी के अनुसार, पूरे नेटवर्क में करीब 135 फर्जी कंपनियों के जरिए 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी बिल तैयार किए गए। इनमें से करीब 734 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी को वास्तविक कंपनियों को कथित तौर पर कमीशन के बदले उपलब्ध कराया गया। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया से 54.33 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय पैदा हुई।
निजी खातों में पहुंचाई गई रकम
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि फर्जी आईटीसी से हासिल रकम को ज्ञानचंद जायसवाल, राज जायसवाल और उनके करीबी रिश्तेदारों के निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया। इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर जमीन, अचल संपत्ति और अन्य कारोबार में निवेश के लिए किया गया।
जमशेदपुर-रांची की कंपनियां भी जांच के घेरे में
ईडी के अनुसार, फर्जी आईटीसी खरीदने वाली लाभार्थी कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जमशेदपुर, रांची और कोलकाता की कई कंपनियों के लेन-देन, खरीद-बिक्री रजिस्टर और डिजिटल खातों की जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि बिना वास्तविक माल की आवाजाही के तैयार किए गए बिलों के जरिए कर चोरी का कथित नेटवर्क संचालित किया गया।
जांच के दौरान 20 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति कुर्क किए जाने तथा करीब 70 लाख रुपये की नकदी और बैंक खातों को फ्रीज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। मामले में विशेष पीएमएलए अदालत में न्यायिक कार्रवाई जारी है।












