
लेस्लीगंज (पलामू) : बच्चों में कुपोषण की पहचान केवल आंकड़े दर्ज करने तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद बच्चे तक स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं भी समय पर पहुंचें—इसी उद्देश्य से लेस्लीगंज प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविकाओं को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम में सही माप लेने, पोषण स्थिति समझने और चिन्हित बच्चों की लगातार निगरानी करने के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। सेविकाओं को पहचान से लेकर फॉलोअप तक की पूरी प्रक्रिया समझाई गई।
सही माप से मिलेगी स्थिति की स्पष्ट जानकारी
प्रशिक्षण में बच्चों की लंबाई और वजन मापने की विधि व्यावहारिक उदाहरणों के साथ बताई गई। प्रशिक्षकों ने समझाया कि माप लेने में शुद्धता जरूरी है, क्योंकि दर्ज जानकारी के आधार पर ही बच्चे की पोषण स्थिति का आकलन किया जाता है। सेविकाओं को यह भी बताया गया कि केवल कम वजन देखकर निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं है। बच्चे की संपूर्ण स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति को ध्यान में रखते हुए कुपोषण के विभिन्न संकेतों को पहचानना आवश्यक है। इसी आधार पर जरूरत के अनुसार आगे की सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जानी है।
पहचान के बाद नियमित फॉलोअप पर जोर
कार्यक्रम में कुपोषित और अति-कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने के साथ उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत समझाई गई। प्रशिक्षण का जोर इस बात पर रहा कि किसी बच्चे की जानकारी दर्ज हो जाने के बाद उसका फॉलोअप भी नियमित रूप से किया जाए। समय-समय पर निगरानी और जानकारी अद्यतन करने से संबंधित बच्चे की स्थिति का रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद मिलेगी। सेविकाओं को पहचान, निगरानी और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच के बीच बेहतर तालमेल बनाने की प्रक्रिया समझाई गई।
मोबाइल ऐप पर जानकारी दर्ज करने का अभ्यास
सामर कार्यक्रम के अंतर्गत मोबाइल अनुप्रयोग का उपयोग भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। सेविकाओं को बच्चों का विवरण दर्ज करने, पोषण स्थिति की जानकारी अपडेट करने और नियमित निगरानी के लिए ऐप इस्तेमाल करने का तरीका बताया गया। प्रशिक्षकों ने सही माप के साथ सही डिजिटल प्रविष्टि की अहमियत पर ध्यान दिलाया। व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया कि जानकारी दर्ज करते समय सावधानी रखी जाए, ताकि उपलब्ध रिकॉर्ड बच्चे की वास्तविक स्थिति को दर्शाए।
स्वास्थ्य विभाग से समन्वय होगा महत्वपूर्ण
चिन्हित बच्चों को स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं से जोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ बेहतर संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया गया। उद्देश्य यह है कि सेविकाओं द्वारा पहचाने गए बच्चों तक आवश्यक सहायता समय पर पहुंचे और आगे की निगरानी भी जारी रहे।प्रशिक्षण का संचालन प्रखंड समन्वयक शिवम कुमार पासवान एवं आलोक मिश्रा कर रहे हैं। महिला पर्यवेक्षक संगीता कुमारी, अपर्णा मिश्रा और अंजू गुप्ता सहित प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविकाएं इसमें भाग ले रही हैं। कार्यक्रम के जरिए मैदानी स्तर पर पहचान, रिकॉर्ड प्रबंधन और विभागीय समन्वय को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।












