
- वन्यजीवों की रक्षा के लिए ग्रामीणों की अनूठी पहल, 2026 में पहली बार एक साथ जमा हुए इतने हथियार
मेदिनीनगर, पलामू : जंगल और वन्यजीवों की रक्षा के लिए पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के ग्रामीणों ने ऐसी पहल की है, जो पूरे झारखंड के लिए मिसाल बन सकती है। गारु क्षेत्र के 25 गांवों के ग्रामीणों ने वन देवी को साक्षी मानकर 31 देसी बंदूकें सरेंडर कर दीं। वन्यजीव सप्ताह के समापन पर शुक्रवार को ग्रामीणों ने प्रकृति संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा का संकल्प लिया।
वन देवी के सामने संकल्प, शिकार के हथियार किए जमा
ग्रामीणों ने प्रकृति के प्रति अपनी आस्था को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ते हुए हथियार जमा किए। उनका कहना है कि वे प्रकृति की पूजा करते हैं और जंगल तथा वन्यजीवों की रक्षा करना चाहते हैं। ग्रामीणों की इस सामूहिक पहल को क्षेत्र में संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
2026 में पहली बार एक साथ सरेंडर हुए 31 हथियार
पलामू टाइगर रिजर्व के इतिहास में वर्ष 2026 में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में देसी हथियार सरेंडर किए गए हैं। इससे पहले वर्ष 2025 में ग्रामीणों ने 23 हथियार जमा किए थे। इस बार 31 हथियार जमा होने से वन विभाग की अपील को ग्रामीणों के बीच मिल रहे समर्थन का संकेत मिला है।
कभी नक्सल प्रभावित रहा है गारु क्षेत्र
पीटीआर का गारु क्षेत्र कभी नक्सल प्रभावित इलाका रहा है। यहां वन्यजीवों के शिकार में देसी हथियारों का इस्तेमाल होता रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का खुद आगे आकर हथियार जमा करना वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
वन विभाग लंबे समय से ग्रामीणों से हथियार सरेंडर करने की अपील कर रहा था। इस बार 25 गांवों के लोगों ने सामूहिक रूप से पहल कर संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
ग्रामीणों के सहयोग से मजबूत होगा वन्यजीव संरक्षण
पीटीआर के उपनिदेशक कुमार आशीष ने बताया कि ग्रामीण स्वयं वन्यजीवों को बचाने के लिए आगे आए हैं। प्रकृति के प्रति उनकी आस्था और संरक्षण की भावना इस पहल का प्रमुख आधार है।
कार्यक्रम में पीटीआर निदेशक एसआर नटेश, उपनिदेशक कुमार आशीष, प्रजेशकान्त जेना समेत वन विभाग के कई अधिकारी मौजूद थे।
खास बात: 25 गांवों की भागीदारी और 31 देसी हथियारों का सरेंडर यह संदेश देता है कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में स्थानीय समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों की यह पहल संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा दे सकती है।












