
पाकुड़ : अमड़ापाड़ा की ऐतिहासिक दुर्गापूजा इस बार आकर्षक रोशनी, विशाल पंडाल और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं का स्वागत करेगी। सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति अपने 102वें पूजा समारोह को यादगार बनाने की तैयारियों में जुटी है। आयोजन के लिए 36 लाख रुपये से अधिक का बजट निर्धारित किया गया है। माँ दुर्गा की 15 फीट ऊंची प्रतिमा, चंदननगर की विद्युत सज्जा और वाराणसी की तर्ज पर होने वाली गंगा आरती प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
एक मंडप में पूरे गांव की आस्था
बांसलोई नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक वैष्णवी दुर्गा मंदिर परिसर में होने वाली यह पूजा सामूहिक आस्था और सामाजिक एकता की पहचान है। वर्ष 1924 में स्थापित समिति की इस परंपरा से गांव के लोग लगातार जुड़े हुए हैं। पूजा समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार उर्फ बबलू भगत के अनुसार, पूरे गांव का एक ही मंडप में एकत्र होकर माँ की आराधना करना आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता है। इस बार भी ग्रामीण और समिति के सदस्य तैयारियों को पूरा करने में जुटे हैं।
विशाल पंडाल और आकर्षक प्रतिमा की तैयारी
मंदिर परिसर में लगभग 5500 वर्गफुट का मुख्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए शिव-पार्वती मंदिर परिसर में 3500 वर्गफुट का अतिरिक्त पंडाल भी बनाया जा रहा है। पंडाल निर्माण में 25 कुशल कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार लगभग तीन लाख रुपये की लागत से माँ दुर्गा की 15 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। वहीं, चंदननगर की विशेष लाइट डिजाइनर टीम करीब 18 लाख रुपये की लागत से मुख्य मार्ग पर रंग-बिरंगे तोरणद्वार और विद्युत सज्जा का काम कर रही है।
महाअष्टमी की शाम आरती बनेगी विशेष आकर्षण
महाअष्टमी की शाम वाराणसी से आने वाले पंडितों की विशेष टीम गंगा आरती संपन्न कराएगी। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। समिति की घोषित कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार, 16 अक्टूबर को देवी बोधन के बाद जूनियर समूह नृत्य प्रतियोगिता होगी। 21 अक्टूबर को सीनियर समूह नृत्य प्रतियोगिता और सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। नवमी की रात डांडिया नृत्य भी उत्सव में रंग भरेगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से अलग-अलग आयु वर्ग के प्रतिभागियों को आयोजन से जोड़ने की तैयारी है।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान
पूजा परिसर की निगरानी के लिए 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। अग्निशमन यंत्रों के साथ भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था भी की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन और कार्यक्रमों के दौरान सुविधा मिल सके। समिति के मुताबिक, पंडाल, प्रतिमा और सजावट की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। धार्मिक परंपरा और सामूहिक भागीदारी के साथ इस वर्ष के उत्सव को विशेष बनाने के लिए सभी सदस्य सहयोग कर रहे हैं।












