
पलामू : झारखंड के पलामू में सोमवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की जान चली गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। मोहम्मदगंज-जपला मुख्य पथ पर भजनिया स्थित नागाबाबा मंदिर के पास बाइक और टेंपो के बीच जोरदार टक्कर हुई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मौके पर ही चली गई रोहित की जान
घटना सोमवार सुबह करीब 9:20 बजे की है। मृतक की पहचान मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र के बटउआ गांव निवासी उदेश राम के पुत्र रोहित के रूप में हुई है। रोहित अपने ननिहाल मोहम्मदगंज के रामनगर में रहता था। जानकारी के अनुसार, वह अपने साथी के साथ बाइक से मोहम्मदगंज से घर की ओर जा रहा था। इसी दौरान विपरीत दिशा से आ रहे टेंपो से बाइक की जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि रोहित के गले में गंभीर चोट आई और उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। बाइक पर सवार दूसरे युवक का माथा फट गया। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। घायल युवक को परिजन इलाज के लिए हुसैनाबाद अस्पताल ले गए।
108 और 112 पर कॉल, फिर भी नहीं मिला जवाब!
हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल आपातकालीन सेवाओं को लेकर उठा। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा पर कई बार कॉल किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 112 पुलिस सेवा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां से भी तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली।
ग्रामीणों के मुताबिक, अंततः थाने के मोबाइल नंबर पर घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, 108 और 112 पर संपर्क नहीं हो पाने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एक महीने में कई हादसे, रफ्तार पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोहम्मदगंज-जपला मुख्य पथ पर भजनिया के मल्होरी टोला से लेकर सबनवा मोड़ तक पिछले एक महीने में कई सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीण तेज रफ्तार और यातायात सुरक्षा मानकों की अनदेखी को हादसों की प्रमुख वजह मान रहे हैं।
पांच साल से जांच, फिर भी नहीं थम रहे हादसे
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि पिछले करीब पांच वर्षों से बाइक जांच अभियान चलाए जाने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि केवल जांच अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। गति नियंत्रण, यातायात नियमों का पालन और सड़क पर नियमित निगरानी भी जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में गति नियंत्रण के उपाय करने, यातायात निगरानी बढ़ाने और आपातकालीन सेवाओं को त्वरित एवं जवाबदेह बनाने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि सड़क पर सुरक्षा के दावे और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था हादसों के वक्त कितनी कारगर साबित हो रही है? रोहित की मौत ने इस सवाल को फिर से गंभीर बना दिया है।












