
- दुकानें बंद होने के बावजूद सड़क किनारे शराब की कथित बिक्री का आरोप, ब्लेंडर्स प्राइड से रॉयल चैलेंज तक उपलब्ध कराने का दावा; निर्धारित कीमत से 50 से 100 रुपये अधिक वसूली की भी चर्चा
जमशेदपुर : जमशेदपुर में ड्राई डे के दिन शराब की बिक्री पर रोक के बावजूद कथित अवैध कारोबार का मामला सामने आया है। सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के स्लैग रोड पर शराब की दुकानों के बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को गाड़ियों तक शराब पहुंचाए जाने का आरोप है। दावा किया जा रहा है कि यहां ग्राहकों को उनकी पसंद के ब्रांड उपलब्ध कराने के साथ पानी, पैकेटबंद चखना और डिस्पोजेबल गिलास तक पहुंचाए जा रहे थे। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह शराबबंदी के आदेशों के अनुपालन और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
दुकानें बंद, फिर कहां से मिल रही थी शराब?
ड्राई डे के दौरान शराब की दुकानों के बंद रहने के बावजूद स्लैग रोड पर कथित बिक्री की शिकायत कई सवाल खड़े करती है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क किनारे शराब खरीदने वालों की भीड़ जुट रही थी। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के रुकने के बाद ग्राहकों तक शराब पहुंचाने का दावा किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकृत दुकानें बंद थीं, तब शराब की आपूर्ति कहां से हो रही थी? क्या शराब पहले से जमा कर रखी गई थी या इसके लिए कोई अलग नेटवर्क काम कर रहा था? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।
पसंदीदा ब्रांड से लेकर चखना तक उपलब्ध कराने का दावा
रिपोर्ट में ब्लेंडर्स प्राइड, बकार्डी, सिग्नेचर, रॉयल स्टैग और रॉयल चैलेंज जैसे ब्रांड की शराब उपलब्ध कराने का उल्लेख है। आरोप है कि ग्राहक की मांग के अनुसार शराब की बोतल गाड़ी तक पहुंचाई जा रही थी। इसके साथ पानी की बोतल, पैकेटबंद चखना, सिगरेट और डिस्पोजेबल गिलास भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
यदि मौके पर इस तरह की व्यवस्था संचालित हो रही थी, तो यह पता लगाना जरूरी है कि शराब उपलब्ध कराने वाले लोग कौन थे और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने की व्यवस्था कैसे चल रही थी।
50 से 100 रुपये तक अधिक कीमत वसूलने का आरोप
कथित अवैध बिक्री के साथ शराब की निर्धारित खुदरा कीमत से 50 से 100 रुपये तक अधिक वसूले जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए संबंधित ब्रांड की बोतलों पर अंकित मूल्य, ग्राहकों से वसूली गई रकम और भुगतान से जुड़े साक्ष्यों की जांच जरूरी है।
यदि निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की पुष्टि होती है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि इसके पीछे कौन लोग शामिल थे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस और उत्पाद विभाग की निगरानी पर सवाल
ड्राई डे के दौरान शराब की दुकानों को बंद रखने के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्लैग रोड पर कथित बिक्री की शिकायत के बाद स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या संबंधित क्षेत्र में नियमित गश्त की जा रही थी? क्या ड्राई डे को लेकर विशेष जांच अभियान चलाया गया था? यदि अवैध बिक्री हो रही थी, तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंची या नहीं? इन बिंदुओं पर विभागों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
जांच और कार्रवाई का इंतजार
ड्राई डे पर शराब की कथित बिक्री का मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है। यह शराब की आपूर्ति के स्रोत, बिक्री की व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता की जांच का भी विषय है। अब देखना होगा कि संबंधित थाना और उत्पाद विभाग मामले की जांच कर क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल, शराब की आपूर्ति के स्रोत, कथित बिक्री में शामिल लोगों और कीमत से अधिक वसूली के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित विभागों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।












