
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच में सीआईडी ने पहली चार्जशीट दाखिल की है। इसमें आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता सहित पांच आरोपियों को शामिल किया गया है। जांच एजेंसी ने ओएमआर शीट में कथित हेरफेर, रुपये लेकर अयोग्य अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण कराने और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी से संबंधित साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का दावा किया है।
डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेज बने जांच का आधार
चार्जशीट के साथ कागजी दस्तावेजों के अलावा डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों के बयान भी प्रस्तुत किए गए हैं। सीआईडी के अनुसार, जांच में ऐसी सामग्री मिली है, जो परीक्षा में सुनियोजित तरीके से अनियमितता किए जाने के आरोपों का समर्थन करती है। एजेंसी का आरोप है कि इस कथित साजिश से योग्य अभ्यर्थियों के चयन की संभावनाएं प्रभावित हुईं, जबकि रुपये लेकर कुछ अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया।
ओएमआर शीट में बदलाव का आरोप
प्रकरण में ओएमआर शीट से जुड़ी गड़बड़ियां जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सीआईडी ने कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर से संबंधित साक्ष्य जुटाए हैं। जांच एजेंसी ने ऐसे उम्मीदवारों के नामों का भी उल्लेख किया है, जिनकी ओएमआर शीट में बदलाव किए जाने का दावा किया गया है। इस मामले में कुछ अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
छापेमारी में जब्त हुए थे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
जांच के दौरान सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर डिजिटल उपकरण, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और विभिन्न कागजी रिकॉर्ड जब्त किए थे। इन सामग्रियों की जांच और समीक्षा की गई। कुछ दस्तावेजों का फॉरेंसिक परीक्षण भी कराया गया। एजेंसी के मुताबिक, जब्त रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को मिलाकर आरोपियों की कथित भूमिका का आकलन किया गया है।
जुलाई में दर्ज हुआ था मामला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीआईडी ने 21 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की थी। इसके अगले दिन, 22 जुलाई को सीआईडी थाने में कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के साथ झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा अधिनियम, 2023 की संबंधित धाराएं भी लगाई गई थीं। इसी दिन श्वेता कुमारी गुप्ता सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
चार्जशीट के बाद न्यायिक प्रक्रिया पर नजर
पहली चार्जशीट दाखिल होने से मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी है। जांच एजेंसी ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी और डिजिटल सामग्री अदालत को सौंपी है। हालांकि, चार्जशीट दाखिल होना दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपों और साक्ष्यों का परीक्षण अदालत में होगा तथा आरोपियों की भूमिका पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।












