
- दो महीने के भीतर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और रजिस्ट्रार जनरल तक अपनी मांग पहुंचाने का लक्ष्य; मरांग बुरु और लुगु बुरु को प्रमुख तीर्थस्थल घोषित करने की भी उठी मांग।
जमशेदपुर : सरना धर्म को आधिकारिक मान्यता दिलाने और आदिवासी समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए संथाल समाज ने पहल तेज करने की तैयारी की है। इसके तहत आगामी दो महीने के भीतर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और भारत के रजिस्ट्रार जनरल को 10 लाख मांग पत्र भेजने का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही मरांग बुरु और लुगु बुरु को संथाल समाज के प्रमुख तीर्थस्थलों के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की मांग भी उठाई गई है।
इस संबंध में बुधवार को ओडिशा के तिरिंग स्थित आसरेका भवन में माझी परगना महाल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संथाल समाज की धार्मिक पहचान, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में समाज के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध लोगों ने हिस्सा लिया।
दो महीने में 10 लाख मांग पत्र भेजने का लक्ष्य
बैठक में सरना धर्म को आधिकारिक मान्यता दिलाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाने पर जोर दिया गया। इसके तहत दो महीने के भीतर 10 लाख मांग पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और भारत के रजिस्ट्रार जनरल तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। समाज की ओर से इस पहल के जरिए अपनी धार्मिक पहचान और मान्यता से जुड़ी मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी है।
सरना धर्म की अलग पहचान को आधिकारिक मान्यता देने की मांग आदिवासी समाज के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। इस अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों को जोड़कर मांग को व्यापक स्तर पर सामने लाने की पहल की जा रही है।
मरांग बुरु और लुगु बुरु को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग
बैठक में मरांग बुरु और लुगु बुरु को संथाल समाज के प्रमुख तीर्थस्थलों के रूप में आधिकारिक तौर पर अधिसूचित करने की मांग भी उठाई गई। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन पवित्र स्थलों का धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में विशेष महत्व है। इन्हें आधिकारिक पहचान मिलने से आदिवासी समाज की परंपराओं और आस्था को व्यापक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में पहल हो सकती है।
माझी परगना व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
बैठक की अध्यक्षता तिरिंग पीड़ परगना बाबा छोटराय हेंब्रम ने की। इस दौरान भांज दिशोम उत्तर नावा के रिक्त देश परगना पद पर दाहिन हांसदा और कुड़ा हांसदा को जिम्मेदारी सौंपी गई। दोनों को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल धाड़ दिशोम के देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने समाज को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने गहन विचार-विमर्श के बाद मजबूत माझी परगना व्यवस्था की स्थापना की थी। इसी पारंपरिक व्यवस्था के आधार पर संथाल समाज आज भी अपनी सामाजिक, धार्मिक और न्याय व्यवस्था का संचालन कर रहा है।
युवा पीढ़ी को शिक्षा और संस्कृति से जुड़ने का संदेश
बैठक में युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की गई। युवाओं से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और समाज को मजबूत बनाने के लिए नशे से दूर रहने का आह्वान किया गया।
इस दौरान तिरिंग, दाड़िमा, ढेंका, खासदेश, जामदा, गोडेताल, उपरेबेड़ा, पाड़सा, बासला, माधुवा और सारंडा पीड़ के परगना बाबाओं को भी पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा करने के संकल्प पर जोर दिया गया।
बैठक में उठे मुद्दों के जरिए संथाल समाज की धार्मिक पहचान, पारंपरिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में सामूहिक पहल का संदेश दिया गया।












