
- रघुवर दास पर टिप्पणी को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को घेरा, कहा- श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था के प्रतीक, उन्हें राजनीति का विषय न बनाएं
जमशेदपुर : झारखंड में भगवान श्रीराम, मर्यादा और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सियासत तेज हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की टिप्पणी पर विधायक पूर्णिमा साहू दास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंत्री को दूसरों को अहंकार और मर्यादा का पाठ पढ़ाने से पहले अपने बयानों और राजनीतिक आचरण पर आत्ममंथन करने की नसीहत दी है।
पूर्णिमा साहू दास ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, मर्यादा और आदर्श के प्रतीक हैं। ऐसे में श्रीराम का नाम लेकर राजनीतिक बयानबाजी करना और दूसरों को रावण की संज्ञा देना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी से राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।
राम मंदिर के मुद्दे पर भी उठाए सवाल
विधायक ने कांग्रेस के राम मंदिर से जुड़े पुराने राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर कांग्रेस की भूमिका को लेकर आज भी राजनीतिक बहस होती है। ऐसे में मंत्री को दूसरों को आस्था और मर्यादा का पाठ पढ़ाने से पहले अपनी पार्टी के इतिहास और राजनीतिक आचरण पर भी विचार करना चाहिए।
रघुवर दास पर टिप्पणी को लेकर किया पलटवार
पूर्णिमा साहू दास ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी को लेकर भी इरफान अंसारी को घेरा। उन्होंने कहा कि किसी घटना पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन पूरी परिस्थिति को समझे बिना किसी व्यक्ति को रावण कहना उचित नहीं है। किसी नेता की राजनीतिक विरासत को व्यक्तिगत टिप्पणियों से मिटाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल चुनावी भाषणों का विषय नहीं हैं। उनके आदर्श सत्य, संयम, न्याय और मर्यादा का संदेश देते हैं। राजनीति में इन आदर्शों का पालन केवल भाषण देने से नहीं, बल्कि अपने शब्दों और व्यवहार से भी करना चाहिए।
‘पहले अपने आचरण में उतारें राम के आदर्श’
विधायक ने कहा कि मर्यादा की सीख देने से पहले उसका पालन करना जरूरी है। श्रीराम के नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारना चाहिए। पूर्णिमा साहू दास के इस बयान के बाद झारखंड में राम, मर्यादा और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।












