
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम में मैट्रिक की तैयारी कर रहे हजारों विद्यार्थियों के लिए कम उपस्थिति चिंता का कारण बन गई है। जिला बाल अधिकार सुरक्षा मंच के अनुसार, जिले के 101 विद्यालयों के 3,060 छात्र-छात्राएं 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति की शर्त से प्रभावित हो सकते हैं। मंच ने उपायुक्त को आवेदन देकर दुर्गम इलाकों के बच्चों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष छूट देने की मांग की है।
दूरी और कठिन रास्तों से जूझ रहे विद्यार्थी
मंच का कहना है कि कई गांवों से विद्यालय की दूरी 10 से 15 किलोमीटर तक है। जंगल और पहाड़ों से घिरे इलाकों में रोज स्कूल पहुंचना बच्चों के लिए आसान नहीं होता। बरसात में नदी-नालों का उफान और परिवहन की कमी उनकी परेशानी बढ़ा देती है। आर्थिक तंगी तथा विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी नियमित पढ़ाई में बाधा बनता है। मंच के मुताबिक, इन कठिनाइयों को देखे बिना केवल उपस्थिति के आधार पर परीक्षा का अवसर तय करने से जरूरतमंद विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
1,616 छात्र और 1,445 छात्राओं पर असर का दावा
जिला बाल अधिकार सुरक्षा मंच के सर्वेक्षण के अनुसार, प्रभावित विद्यार्थियों में 1,616 छात्र और 1,445 छात्राएं शामिल हैं। हालांकि, इन दोनों आंकड़ों का जोड़ 3,061 होता है, जबकि कुल संख्या 3,060 बताई गई है। ऐसे में संबंधित आंकड़ों के मिलान की जरूरत है। मंच ने प्रशासन से विद्यालयवार स्थिति और बच्चों की वास्तविक समस्याओं पर विचार करने का आग्रह किया है।
परीक्षा फॉर्म रुका तो साल प्रभावित होने की आशंका
मंच ने चिंता जताई है कि उपस्थिति की निर्धारित सीमा पूरी नहीं होने पर यदि विद्यार्थियों को मैट्रिक परीक्षा का फॉर्म भरने से रोका गया, तो उनका एक शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है। लंबे समय से मुश्किल परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखने वाले बच्चों के सामने शिक्षा से दूर होने का खतरा भी बढ़ सकता है। आवेदन में शैक्षणिक सत्र 2025–26 के पात्र विद्यार्थियों को विशेष राहत देने की मांग की गई है। साथ ही 50 से 60 प्रतिशत उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से परीक्षा में शामिल करने पर विचार करने का अनुरोध किया गया है।
छूट के साथ स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने की मांग
मंच ने आठवीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों का अगली कक्षा में नामांकन सुनिश्चित कराने, शिक्षकों की कमी दूर करने तथा स्कूलों में पेयजल, शौचालय और बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक पहल करने की अपील की है। फिलहाल आवेदन के जरिए राहत मांगी गई है; विद्यार्थियों को छूट देने संबंधी किसी अंतिम प्रशासनिक निर्णय का उल्लेख उपलब्ध विवरण में नहीं है।












