
- टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन में देश-विदेश के संगठनों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
- टाटा संस की लिस्टिंग और प्रबंधन को लेकर विवाद के बीच पारंपरिक स्वामित्व व्यवस्था बचाने की अपील
नई दिल्ली : टाटा संस की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर जारी विवाद के बीच छह प्रमुख पारसी संगठन टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन में उतर आए हैं। देश-विदेश के इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर टाटा समूह की पारंपरिक स्वामित्व व्यवस्था और उसकी विरासत को संरक्षित रखने की अपील की है। संगठनों का कहना है कि टाटा समूह की पहचान केवल एक बड़े कारोबारी घराने के रूप में नहीं, बल्कि समाजसेवा और परोपकार की लंबी परंपरा के लिए भी रही है। ऐसे में मौजूदा विवाद को केवल दो शेयरधारकों के बीच का मामला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।
संगठनों ने पत्र में कहा है कि टाटा संस की मौजूदा स्वामित्व व्यवस्था में टाटा ट्रस्ट्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी व्यवस्था ने समूह को दीर्घकालिक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करने और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने में मदद की है। इसलिए इस व्यवस्था के भविष्य को लेकर होने वाले फैसलों का प्रभाव व्यापक हो सकता है।
परोपकार की परंपरा बनाए रखने पर जोर
पारसी संगठनों की चिंता टाटा समूह की कारोबारी संरचना तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि समूह की ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक योगदान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। संगठनों ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि टाटा समूह के पारंपरिक मालिकाना हक और कामकाज के तरीके को संरक्षित रखने की दिशा में ध्यान दिया जाए, ताकि समाजसेवा और परोपकार की परंपरा आगे भी जारी रह सके।
टाटा समूह लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों से जुड़ा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण माना जाता है।
आरबीआइ के रुख से बढ़ी सूचीबद्धता की चर्चा
दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पंजीकरण और नियामकीय अनुपालन की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या परोक्ष पहुंच रखने वाली बड़ी एनबीएफसी और मुख्य निवेश कंपनियों के लिए नियामकीय नियमों का पालन जरूरी है।
पिछले महीने आरबीआइ ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की एनबीएफसी पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने संबंधी अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी की नियामकीय स्थिति और शेयर बाजार में संभावित सूचीबद्धता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
टाटा संस की सूचीबद्धता और स्वामित्व व्यवस्था को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, इस पर कारोबारी जगत की नजर बनी हुई है। वहीं, पारसी संगठनों की अपील ने इस बहस में टाटा समूह की ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक जिम्मेदारी और दीर्घकालिक कारोबारी दृष्टिकोण को भी प्रमुखता से सामने ला दिया है।












