
- मंगल करमाकर और पत्नी मालती मुर्मू ने कोलकाता में पुलिस कमिश्नर के समक्ष हथियारों के साथ किया सरेंडर, झारखंड में पांच लाख रुपये का इनामी है मंगल; कुकड़ू हाट में पांच जवानों की हत्या समेत कई बड़ी घटनाओं से जुड़े रहे हैं दोनों के नाम
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम के पूर्व सांसद एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता सुनील महतो हत्याकांड से जुड़े माओवादी दंपती मंगल करमाकर उर्फ मंगल महतो उर्फ समीर और उसकी पत्नी मालती मुर्मू उर्फ छोटो मांडी के आत्मसमर्पण के बाद करीब 19 साल पुराने मामले पर एक बार फिर नजरें टिक गई हैं। दोनों ने शुक्रवार को कोलकाता में पुलिस कमिश्नर अजय नंद के समक्ष हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। दोनों लंबे समय तक झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे जंगलों तथा कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। इनके आत्मसमर्पण से पुराने माओवादी मामलों की जांच और संगठन के नेटवर्क से जुड़े तथ्यों को लेकर पूछताछ की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, सुनील महतो हत्याकांड में दोनों की सटीक भूमिका और मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से होना जरूरी है।
बाघुड़िया फुटबाल मैदान में हुई थी सुनील महतो की हत्या
चार मार्च 2007 को पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला क्षेत्र के बाघुड़िया फुटबाल मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन झामुमो सांसद सुनील महतो की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में सांसद समेत चार लोगों की मौत हुई थी। घटना ने झारखंड की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया था। जांच के दौरान माओवादी नेटवर्क से जुड़े कई नाम सामने आए थे। मंगल करमाकर और मालती मुर्मू का नाम भी इस मामले के संदर्भ में सामने आने की बात कही जाती रही है। अब दोनों के आत्मसमर्पण के बाद इस हत्याकांड में उनकी कथित भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कुकड़ू हाट में पांच पुलिसकर्मियों की हत्या से भी जुड़ा नाम
मंगल और मालती का नाम सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू हाट में पांच पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में भी सामने आता रहा है। 14 जून 2019 को तिरुलडीह थाना क्षेत्र के कुकड़ू हाट में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों पर माओवादी हमला हुआ था। इस घटना में पांच पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। हमलावर पुलिसकर्मियों के हथियार और कारतूस भी लूट ले गए थे। इस घटना ने कोल्हान और आसपास के क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी। दोनों के आत्मसमर्पण के बाद इस मामले में उनकी भूमिका से संबंधित तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
एके-47 और इंसास राइफल के साथ किया आत्मसमर्पण
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण के दौरान मंगल करमाकर ने एक एके-47 राइफल और कारतूस, जबकि मालती मुर्मू ने एक इंसास राइफल और मैगजीन सौंपे। मंगल पर झारखंड सरकार की ओर से पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने दोनों पर अलग-अलग दो-दो लाख रुपये का इनाम रखा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों के खिलाफ विभिन्न थानों में 40 से अधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों की संख्या, प्रकृति और वर्तमान कानूनी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
माओवादी संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारी
मंगल करमाकर को माओवादी संगठन में जोनल स्तर पर सक्रिय बताया गया है। वह पश्चिम मेदिनीपुर के रांगरा गांव का निवासी है और माओवादी कमांडर असीम मंडल उर्फ आकाश के दस्ते में अंगरक्षक रह चुका है। उसकी पत्नी मालती मुर्मू झाड़ग्राम के गोपीबल्लभपुर क्षेत्र की रहने वाली है। उसे संगठन में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय बताया गया है। मालती लंबे समय तक सारंडा और सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय रही। दोनों की संगठनात्मक भूमिका को देखते हुए पुलिस पूछताछ में माओवादी नेटवर्क, संपर्कों और पुरानी घटनाओं से संबंधित जानकारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे के संदर्भ में भी चर्चा
28 मई 2010 को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे में 148 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले की सीबीआइ जांच के दौरान माओवादी नेटवर्क से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे। मंगल और मालती का नाम भी इस घटना के संदर्भ में चर्चा में रहा है। हालांकि, हादसे में दोनों की कथित भूमिका, उनके खिलाफ दर्ज आरोप और मामले की कानूनी स्थिति को लेकर आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि आवश्यक है। आत्मसमर्पण के बाद इस मामले में उनसे पूछताछ होगी या नहीं, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पुराने मामलों की जांच पर रहेगी नजर
माओवादी दंपती के आत्मसमर्पण के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस पूछताछ में पुराने हत्याकांडों और माओवादी नेटवर्क को लेकर क्या जानकारी सामने आती है। सुनील महतो हत्याकांड, कुकड़ू हाट हमला और अन्य मामलों में दोनों की भूमिका की पुष्टि संबंधित केस रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और न्यायिक दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकेगी। फिलहाल आत्मसमर्पण को पुराने मामलों की जांच के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।












