
जमशेदपुर : मोबाइल स्क्रीन पर बढ़ती व्यस्तता और किताबों से घटती नजदीकी को लेकर कवि एवं अभिनेता शैलेश लोढ़ा ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पढ़ने की आदत कमजोर होने से युवा साहित्य के साथ देश के इतिहास और उसके संघर्षों से भी दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से पुस्तकों के लिए समय निकालने और अपने बजट का कुछ हिस्सा किताबें खरीदने पर खर्च करने की अपील की। शनिवार को हास्य नाटक ‘डैड्स गर्लफ्रेंड’ के मंचन के सिलसिले में जमशेदपुर पहुंचे लोढ़ा ने बातचीत के दौरान साहित्य, मनोरंजन, सामाजिक मूल्यों और युवाओं की बदलती जीवनशैली पर अपनी राय रखी।
फोटो गैलरी से आगे भी है दुनिया
लोढ़ा ने कहा कि पहले युवाओं का पुस्तकालयों से जुड़ाव दिखाई देता था, जबकि अब मोबाइल और सोशल मीडिया उनकी दिनचर्या पर हावी हो रहे हैं। उनके मुताबिक, छपे हुए शब्दों से दूरी का असर सोच और समझ पर भी पड़ता है। देश के अतीत, उसकी यात्रा और वर्तमान तक पहुंचने के संघर्ष को समझने के लिए पढ़ना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को जीवन के अनुभवों से सीखने के साथ पुस्तकों से दोस्ती करने की सलाह दी। उनका जोर इस बात पर रहा कि पढ़ना केवल परीक्षा या जरूरत तक सीमित नहीं होना चाहिए।
हंसी के नाम पर मर्यादा टूटने पर सवाल
बदलते हास्य और स्टैंडअप कॉमेडी पर चर्चा करते हुए लोढ़ा ने कहा कि भाषा, संवाद और पारिवारिक रिश्तों की गरिमा को नजरअंदाज करना चिंताजनक है। उनके अनुसार, अशालीन प्रस्तुतियों पर मिलने वाले ठहाके और तालियां भी समाज की बदलती पसंद पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कलाकारों से अपनी जिम्मेदारी समझने की बात कही। उनके मुताबिक, प्रस्तुति का उद्देश्य केवल तत्काल मनोरंजन और तालियां हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसा सार्थक संदेश देना भी होना चाहिए, जो लोगों की स्मृति में बना रहे।
समाज को दिशा देती है लेखकों की कलम
लोढ़ा ने सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास में बड़े जनजागरण और क्रांतियों के पीछे लेखकों के विचारों तथा उनकी कलम का प्रभाव रहा है। इसलिए नई पीढ़ी का साहित्य से जुड़ना आवश्यक है। कविता की अपनी जगह और ताकत पर भरोसा जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मनोरंजन के बदलते स्वरूपों के बीच भी साहित्य का महत्व बना रहेगा।
अभिनय से लोकप्रियता, कविता से मूल पहचान
‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अपनी भूमिका से घर-घर पहचान बनाने वाले लोढ़ा ने कहा कि उनकी मूल पहचान कवि की है। कविता ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया और अभिनय के रास्ते भी खोले। जमशेदपुर से अपने पुराने लगाव का जिक्र करते हुए उन्होंने शहर की बहुसांस्कृतिक पहचान और विविधता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां का सांस्कृतिक वातावरण उन्हें हमेशा प्रभावित करता रहा है।












