
जमशेदपुर : दीपावली पर पटाखे जलाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए समय और आवाज से जुड़े नियम जानना जरूरी है। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के दिशा-निर्देशों के अनुसार दीपावली और गुरुपर्व पर रात आठ से दस बजे तक ही आतिशबाजी की अनुमति होगी। तय समय के बाहर पटाखे चलाने और निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है। त्योहार के दौरान जमशेदपुर और आसपास करीब दस स्थानों पर वायु तथा ध्वनि प्रदूषण की निगरानी भी की जाएगी।
हवा की गुणवत्ता के अनुसार मिलेगी अनुमति
पर्षद के निर्देशों के मुताबिक, राज्य के जिन शहरी इलाकों में वायु गुणवत्ता अच्छी या संतोषप्रद श्रेणी में होगी, वहां निर्धारित मानकों वाले पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति रहेगी। इस श्रेणी में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई का स्तर शून्य से 100 के बीच रहता है। पटाखों की आवाज भी निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। निर्देशों में 125 डेसिबल से कम ध्वनि वाले पटाखों की अनुमति का उल्लेख है। अधिक शोर पैदा करने वाले पटाखों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। लोगों से समय और ध्वनि सीमा का पालन करते हुए त्योहार मनाने की अपील की गई है।
छठ और नववर्ष के लिए अलग समय
दीपावली और गुरुपर्व के अलावा अन्य त्योहारों पर भी आतिशबाजी का समय निर्धारित किया गया है। छठ पूजा के दौरान सुबह छह से आठ बजे तक पटाखे चलाए जा सकेंगे। वहीं, क्रिसमस और नववर्ष के अवसर पर रात 11:55 बजे से मध्यरात्रि 12:30 बजे तक आतिशबाजी की अनुमति होगी। दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। समय सीमा और प्रदूषण संबंधी मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इन इलाकों में लगाए जाएंगे मापक यंत्र
प्रदूषण की स्थिति जानने के लिए आदित्यपुर एस टाइप चौक, पान दुकान चौक, बिष्टुपुर लाइट सिग्नल, टाटा मुख्य अस्पताल, साकची गोलचक्कर, जमशेदपुर कोर्ट और सोनारी में निगरानी की जाएगी। इसके अलावा आदित्यपुर स्थित प्रदूषण नियंत्रण पर्षद कार्यालय, बिष्टुपुर में गोपाल मैदान के पास और गोलमुरी के टिनप्लेट गोलचक्कर के आसपास भी जांच होगी। मापक यंत्रों से आतिशबाजी के कारण हवा और शोर के स्तर में होने वाले बदलाव दर्ज किए जाएंगे। रिहायशी क्षेत्रों और साइलेंट जोन पर भी नजर रखी जाएगी।
जांच के आंकड़ों से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
क्षेत्रीय पदाधिकारी जीतेंद्र सिंह के अनुसार, त्योहारों के दौरान पर्यावरण की स्थिति जानने के लिए विभिन्न स्तरों पर जांच की जाती है। दुर्गापूजा के दौरान जल की गुणवत्ता की जांच हुई थी। अब दीपावली पर वायु और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी होगी। इससे प्रदूषण के वास्तविक आंकड़े मिलेंगे और जरूरत के अनुसार नियंत्रण के कदम उठाने में मदद मिलेगी।












