
जमशेदपुर: टाटा स्टील ने जिम्मेदार और मानव-केंद्रित औद्योगिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया वैश्विक मुकाम हासिल किया है। कंपनी को SA8000:2014 मल्टी साइट प्रमाणन प्राप्त हुआ है, जिसके साथ वह कार्यबल कवरेज के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी SA8000 प्रमाणित कंपनी बन गई है। यह प्रमाणन देशभर में स्थित टाटा स्टील की 23 साइट्स और वहां कार्यरत 1,19,230 कर्मचारियों को कवर करता है। इसके साथ ही कंपनी सोशल अकाउंटेबिलिटी इंटरनेशनल (SAI) द्वारा निर्धारित माइनिंग एवं मिनरल प्रोसेसिंग श्रेणी में भी दुनिया की सबसे बड़ी SA8000 प्रमाणित संस्था बन गई है। SA8000 प्रमाणन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यस्थल पर मानवाधिकारों की सुरक्षा, श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षित कार्य वातावरण और नैतिक श्रम प्रथाओं को सुनिश्चित करने वाला प्रतिष्ठित वैश्विक मानक माना जाता है। यह मानक अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के श्रम मानकों, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और राष्ट्रीय श्रम कानूनों पर आधारित है।
दो वर्षों की मेहनत के बाद मिली सफलता
कंपनी के अनुसार यह उपलब्धि दो वर्षों से अधिक समय तक चले व्यापक प्रयासों का परिणाम है। टाटा स्टील की SA8000 स्टीयरिंग कमेटी और 23 प्रमाणित इकाइयों की सोशल परफॉर्मेंस टीमों ने मिलकर सभी इकाइयों में सामाजिक जवाबदेही और श्रम मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया। टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट सर्विसेज) डी.बी. सुंदरा रामम ने कहा कि यह प्रमाणन मानवाधिकारों की रक्षा, कर्मचारियों के सम्मान और नैतिक श्रम व्यवस्था के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ औद्योगिक विकास तभी संभव है, जब सामाजिक उत्तरदायित्व और मानव गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
सामाजिक जवाबदेही में पहले भी बना चुका है इतिहास
टाटा स्टील सामाजिक जवाबदेही के क्षेत्र में पहले भी कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर चुकी है। वर्ष 2004 में कंपनी की सुकिंदा माइंस दुनिया की पहली खनन इकाई बनी थी, जिसे SA8000 प्रमाणन मिला था। इसके बाद टाटा स्टील जमशेदपुर दुनिया का पहला इस्पात संयंत्र बना, जिसने यह प्रतिष्ठित प्रमाणन हासिल किया। इस नई उपलब्धि के साथ टाटा स्टील ने एक बार फिर साबित किया है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ कर्मचारियों के अधिकारों, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उसकी प्रतिबद्धता वैश्विक स्तर पर नई मिसाल कायम कर रही है।
