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Bihar में नई सरकार की चर्चाओं के बीच बड़ा प्रशासनिक फेरबदल। सीएम नीतीश के करीबी IAS अनुपम कुमार समेत कई अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए। 15 अप्रैल को नई सरकार की संभावना !

Bihar IAS Transfer: बिहार की सत्ता में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट के बीच प्रशासनिक महकमे में एक अप्रत्याशित ‘क्लीन स्वीप’ देखने को मिला है। एक तरफ जहां नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन की अटकलें तेज हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले IAS अधिकारियों ने दिल्ली का रुख कर लिया है।

मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार समेत कई दिग्गज अफसरों को अचानक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर भेजा जाना महज एक रूटीन तबादला है या भविष्य की किसी नई राजनीतिक बिसात की तैयारी? प्रशासनिक गलियारों में मची इस खलबली ने बिहार की भावी राजनीति को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है।

सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद बिहार की पूरी ब्यूरोक्रेसी में व्यापक पुनर्गठन की तैयारी चल रही है, जिससे नौकरशाही का चेहरा काफी हद तक बदल सकता है।

कहा जा रहा है कि नई सरकार बनने के साथ ही कई अहम पदों पर नए आईएएस अधिकारी को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। यह बदलाव केवल ट्रांसफर-तबादले तक सीमित नहीं होगा, बल्कि प्रशासनिक ढांचे की नई दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक उनके केंद्र सरकार में जाने की संभावना प्रबल है और उन्हें नीति आयोग में सदस्य बनाए जाने की चर्चा तेज़ है। बता दें कि दीपक कुमार 2021 से संविदा पर कार्यरत हैं और इससे पहले 2018 से 2021 तक राज्य के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव इस संभावित नई भूमिका को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

इसी के साथ सचिव अनुपम कुमार और ओएसडी गोपाल सिंह को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की सहमति बनती नजर आ रही है। अगर यह फैसला अंतिम रूप लेता है तो बिहार प्रशासन से कई अनुभवी चेहरे दिल्ली की नौकरशाही में अपनी भूमिका निभाते दिखाई देंगे।

प्रशासनिक हलकों में इसे सामान्य फेरबदल नहीं बल्कि सिस्टम री-इंजीनियरिंग के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार के गठन के साथ ही कामकाज की गति और दिशा दोनों में बदलाव लाने के लिए अनुभवी और नए अधिकारियों का मिश्रण तैयार किया जाएगा।

जानकारों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के साथ ब्यूरोक्रेसी में यह संभावित बदलाव न सिर्फ प्रशासनिक संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि नीतिगत फैसलों की गति और प्राथमिकताओं को भी नया आकार देगा।

बहरहाल बिहार में जहां एक तरफ नई सरकार के गठन की राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ नौकरशाही में होने वाला यह संभावित बदलाव आने वाले दिनों में प्रशासनिक इतिहास का एक अहम अध्याय साबित हो सकता है।

सौजन्य- सूत्र

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