
सबसे चिंताजनक बात यह है कि असहाय विधवा तीजो कुँअर को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना, अंबेडकर आवास योजना या किसी अन्य सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। वर्षों से जर्जर कच्चे मकान में रहने के बावजूद पक्का घर नहीं मिलने से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में प्रखंड पीएम आवास समन्वयक रुस्तम कुमार ने बताया कि तत्काल राहत उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि महिला आवेदन करती हैं तो अंबेडकर आवास योजना के तहत प्रक्रिया शुरू कर सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी जागो महतो से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
घटना के बाद सांसद प्रतिनिधि बंटी सिंह, पूर्व मुखिया भोला नाथ साहू, पूर्व मुखिया प्रमोद सिंह समेत ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को प्राथमिकता के आधार पर आवास योजना का लाभ देने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते जर्जर मकानों की पहचान कर जरूरतमंदों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। यह घटना केवल एक कच्चे मकान के ढहने की नहीं, बल्कि गरीबों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने वाली सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।