
बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड में एसआईआर कार्य के दौरान 51 वर्षीय शिक्षक नील मोहन माईती की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। घटना बुधवार की है। नील मोहन माईती बरागाढ़िया मध्य विद्यालय में पदस्थापित थे और पुरनापानी पंचायत क्षेत्र में एसआईआर ड्यूटी पर तैनात थे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर सहकर्मी शिक्षक उन्हें अंचलाधिकारी के सरकारी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बहरागोड़ा लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
सीएचसी पहुंचते ही जुटे शिक्षक और ग्रामीण
शिक्षक की मौत की सूचना मिलते ही सीएचसी परिसर में शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। बहरागोड़ा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नील मोहन माईती अपने पीछे पत्नी कृष्णा माईती और दो पुत्रियों लिशा माईती एवं श्रेया माईती को छोड़ गए हैं।
शिक्षक संघ ने एसआईआर ड्यूटी के दबाव पर उठाए सवाल
झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष पुलिन बिहारी कुईला ने घटना पर आक्रोश जताते हुए आरोप लगाया कि प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को पिछले तीन-चार महीनों से लगातार एसआईआर कार्य में लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि कार्य को लेकर बनाए जा रहे कथित दबाव से शिक्षकों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
कुईला ने दावा किया कि नील मोहन माईती को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर ड्यूटी के दौरान काम के दबाव के बीच उनकी तबीयत बिगड़ी। संघ ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
सीओ बोले- किसी शिक्षक पर नहीं बनाया गया दबाव
शिक्षकों के आरोपों पर अंचलाधिकारी राजाराम सिंह मुंडा ने कहा कि किसी भी शिक्षक पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाता है। उनके अनुसार सभी शिक्षक आपसी सहयोग और समन्वय के साथ सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं तथा प्रशासन का रवैया सहयोगात्मक है।
शोकसभा के बाद एसआईआर कार्य रहा बंद
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उत्पल मुर्मू ने बताया कि सीएचसी में शिक्षक की जांच की गई थी। प्रारंभिक तौर पर हार्ट अटैक की आशंका जताई गई है। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
घटना के बाद पुरनापानी पंचायत भवन में शोकसभा आयोजित कर दिवंगत शिक्षक को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद एसआईआर कार्य बंद रखा गया। शिक्षक की अचानक मौत से क्षेत्र के शिक्षकों और ग्रामीणों में शोक के साथ आक्रोश का माहौल है।











