
अनुगुल : ओडिशा के अनुगुल जिले की बलदा पहाड़ियों में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन को लेकर मंगलवार को तनाव की स्थिति बन गई। नंदपुर ब्लॉक के बलदा पहाड़ी क्षेत्र में कथित ड्रोन सर्वे का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया। सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे और सर्वे करने पहुंची अदाणी समूह की टीम को घेर लिया। ग्रामीणों ने कंपनी के प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को रोककर बंधक बना लिया।
सूचना मिलने पर पांडुआ पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के बीच घिरी टीम को मुक्त कराया। ग्रामीणों द्वारा रोके गए ड्रोन और वाहनों को पुलिस ने जब्त कर लिया। इसके बाद सर्वे का काम रोक दिया गया।
ड्रोन सर्वे को लेकर ग्रामीणों में क्यों बढ़ा आक्रोश?
बलदा पहाड़ी संरक्षण समिति की ओर से पांडुआ थाने में शिकायत देकर ड्रोन सर्वे को कथित रूप से अवैध बताया गया है। समिति का कहना है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में पहाड़ियों और जमीन से जुड़े किसी भी बड़े फैसले से पहले स्थानीय ग्रामसभा की भूमिका और सहमति महत्वपूर्ण है।
समिति के अध्यक्ष अजय मुंडली और विजय कुमार के नेतृत्व में चिलम, केंतासारू, खड़ापुट, कंधागुड़ा, तैनतार और बलदा समेत कई गांवों के ग्रामीण सर्वे का विरोध करने पहुंचे थे।
ग्रामीणों के पांच बड़े सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि-
- ड्रोन सर्वे की अनुमति किस विभाग ने दी?
- ग्रामसभा को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी या नहीं?
- सर्वे का वास्तविक उद्देश्य क्या था?
- पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं?
- प्रस्तावित खनन में आदिवासी जमीन और सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा कैसे होगी?
ग्रामसभा की भूमिका पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खनन गतिविधियों के बीच उन्हें यह स्पष्ट जानकारी चाहिए कि सर्वे किस प्रक्रिया के तहत कराया जा रहा है और ग्रामसभा की भूमिका क्या होगी। बलदा, भेजा, बादेल, अटांडा और कुलबीर पंचायतों के ग्रामीण प्रस्तावित खनन के लिए आयोजित ग्रामसभा और जनसुनवाई का भी विरोध कर रहे हैं।
उनका कहना है कि केवल कंपनी की ओर से किए जा रहे सर्वे के आधार पर क्षेत्र के भविष्य का फैसला नहीं होना चाहिए।
पहले भी हो चुका है विरोध
बलदा पहाड़ी संरक्षण समिति के अनुसार, सीएसआर गतिविधियों के नाम पर कंपनी के अधिकारियों के गांवों में पहुंचने को लेकर भी पहले विरोध हो चुका है। कुछ दिन पहले बलदा में अदाणी की मोबाइल स्वास्थ्य सेवा के वाहन का भी विरोध किए जाने की बात सामने आई थी।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, बलदा पहाड़ियों और गुफाओं को वर्ष 2008 में पर्यावरण पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता मिली थी। बाद में पहाड़ी क्षेत्र को खनन के लिए चिह्नित किया गया और नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से अदाणी समूह को खनन अधिकार मिलने की बात सामने आई।
अब असली विवाद सिर्फ ड्रोन सर्वे का नहीं
विवाद अब ड्रोन सर्वे से आगे बढ़कर आदिवासी क्षेत्र की जमीन, सामुदायिक संसाधनों और ग्रामसभा की भूमिका तक पहुंच गया है। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि प्रस्तावित खनन से पहले निर्णय की प्रक्रिया क्या होगी और स्थानीय समुदाय की भागीदारी किस स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल पुलिस के हस्तक्षेप के बाद सर्वे रोक दिया गया है और रोके गए ड्रोन व वाहनों को जब्त किए जाने की बात सामने आई है।











