
- BARC की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार जादूगोड़ा में प्राकृतिक पृष्ठभूमि विकिरण 2.6 मिलीसीवर्ट प्रति वर्ष, वैश्विक औसत 3.0 मिलीसीवर्ट; पानी, मिट्टी और टेलिंग्स पोंड की निगरानी में गंभीर रेडियोधर्मी प्रदूषण नहीं मिलने का दावा
जमशेदपुर : जादूगोड़ा के यूरेनियम खनन क्षेत्र में रेडिएशन और उससे होने वाली स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की तकनीकी रिपोर्ट और निगरानी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जादूगोड़ा क्षेत्र में प्राकृतिक पृष्ठभूमि विकिरण का स्तर वैश्विक औसत से कम पाया गया है। रिपोर्ट में पानी, मिट्टी और टेलिंग्स पोंड की स्थिति को लेकर भी सुरक्षा का दावा किया गया है।
वैश्विक औसत से भी कम रेडिएशन
BARC के हेल्थ फिजिक्स यूनिट से जुड़ी तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार जादूगोड़ा क्षेत्र में प्राकृतिक पृष्ठभूमि विकिरण करीब 2.6 मिलीसीवर्ट प्रति वर्ष दर्ज किया गया। इसकी तुलना में वैश्विक औसत करीब 3.0 मिलीसीवर्ट प्रति वर्ष बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार केरल के कुछ तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक पृष्ठभूमि विकिरण करीब 15.7 मिलीसीवर्ट प्रति वर्ष तक दर्ज किया जाता है। इसका मतलब यह है कि प्राकृतिक रूप से मौजूद विकिरण का स्तर अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में काफी अलग हो सकता है।
कैंसर से संबंध पर क्या कहा गया?
यूरेनियम खनन को लेकर जादूगोड़ा में लंबे समय से कैंसर और अन्य बीमारियों की आशंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं। रिपोर्ट में UCIL की ओर से BARC, टाटा मेमोरियल सेंटर, TISS समेत 10 से अधिक संस्थानों के अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्थानीय बीमारियों या कैंसर का यूरेनियम खनन और रेडिएशन से सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निष्कर्ष को समझने के लिए संबंधित अध्ययनों की पद्धति, नमूना आकार और लंबे समय के स्वास्थ्य आंकड़ों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
पानी में यूरेनियम की मात्रा नगण्य बताई गई
BARC की स्वतंत्र निगरानी के दौरान जादूगोड़ा, नरवापहाड़ और तुरामडीह क्षेत्र के भूजल में यूरेनियम की मात्रा निर्धारित पेयजल मानक की तुलना में नगण्य पाए जाने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार टेलिंग्स पोंड यानी खनन अपशिष्ट तालाब के आसपास की मिट्टी और भूजल में रेडियोधर्मी तत्वों के रिसाव का प्रमाण नहीं मिला।
खदान कर्मचारियों का रेडिएशन भी सीमा से कम
रिपोर्ट में कहा गया है कि खदान कर्मचारियों को मिलने वाला विकिरण नियामक संस्था AERB की निर्धारित 20 मिलीसीवर्ट प्रति वर्ष की सीमा से काफी कम है। इससे यह संकेत मिलता है कि कार्यस्थल पर रेडिएशन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को नियामक मानकों के अनुरूप रखने का दावा किया जा रहा है।
जादूगोड़ा की खदानों में यूरेनियम ग्रेड कितना?
रिपोर्ट में जादूगोड़ा की खदानों में अयस्क का ग्रेड 0.05 प्रतिशत से भी कम बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इसे IAEA के मानकों के संदर्भ में कम श्रेणी का अयस्क माना जाता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है जादूगोड़ा?
जादूगोड़ा केवल एक स्थानीय खनन क्षेत्र नहीं है। यहां से मिलने वाला यूरेनियम भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। घरेलू यूरेनियम संसाधनों की उपलब्धता भारत की परमाणु ईंधन सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है।
देश में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है। भविष्य के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों में घरेलू संसाधनों की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में जादूगोड़ा समेत देश की अन्य यूरेनियम खदानों का महत्व भी बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों के लिए क्यों अहम है रिपोर्ट?
जादूगोड़ा में दशकों से यूरेनियम खनन हो रहा है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर रेडिएशन, पानी, मिट्टी और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठते रहे हैं। BARC की निगरानी रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े इन सवालों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।
रिपोर्ट में रेडिएशन स्तर, भूजल, मिट्टी, टेलिंग्स पोंड और खदान कर्मचारियों के एक्सपोजर की निगरानी के आधार पर सुरक्षा का दावा किया गया है। हालांकि, स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य पर किसी भी अंतिम निष्कर्ष के लिए स्वतंत्र और दीर्घकालिक महामारी विज्ञान संबंधी अध्ययन भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
निष्कर्ष
जादूगोड़ा के रेडिएशन को लेकर लंबे समय से चली आ रही आशंकाओं के बीच BARC की रिपोर्ट में प्राकृतिक पृष्ठभूमि विकिरण का स्तर वैश्विक औसत से कम बताए जाने का दावा किया गया है। पानी, मिट्टी और टेलिंग्स पोंड की निगरानी में भी गंभीर रेडियोधर्मी प्रदूषण नहीं मिलने की बात सामने आई है।
इस रिपोर्ट से जादूगोड़ा में रेडिएशन और स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर जारी बहस को वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर देखने का एक नया आधार मिलता है। साथ ही स्थानीय लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए रेडिएशन, पर्यावरण और स्वास्थ्य की स्वतंत्र एवं नियमित निगरानी जारी रहना महत्वपूर्ण होगा।












