
रांची : हजारीबाग स्थित डिटेंशन सेंटर में रह रही एक बांग्लादेशी महिला ने उसके साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया है। मामले में तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे प्रकरण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
2020 से 2022 के बीच दुष्कर्म का आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान महिला की ओर से बताया गया कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच डिटेंशन सेंटर में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। महिला के आरोप के बाद तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अदालत के समक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से पेश सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला से तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म के आरोप का उल्लेख किया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर भी आगे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
सजा पूरी होने के बाद भी डिटेंशन सेंटर में क्यों?
सुनवाई के दौरान अदालत ने महिला को लंबे समय से डिटेंशन सेंटर में रखे जाने पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम से जुड़े मामले में तीन साल की सजा हुई थी और वह सजा पूरी कर चुकी है, तो इसके बाद भी उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया?
अदालत ने यह भी जानना चाहा कि सजा पूरी होने के बाद महिला को डिटेंशन सेंटर में रखने की आवश्यकता क्यों बनी हुई है।
2023 से बांग्लादेश भेजने की कोशिश, अब तक जवाब नहीं
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से ही विदेश मंत्रालय के साथ पत्राचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के अधिवक्ता से भी जवाब दाखिल करने को कहा है, ताकि महिला को वापस भेजने की प्रक्रिया और उसमें हो रही देरी की स्थिति स्पष्ट हो सके।
2018 में दर्ज हुए थे दो मामले
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो मामले दर्ज हुए थे। इनमें एक मामला बच्चे के अपहरण से संबंधित था, जबकि दूसरा विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था।
अपहरण के मामले में महिला को दो साल की सजा हुई थी। वहीं, विदेशी अधिनियम से जुड़े मामले में वर्ष 2021 में उसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी। सजा पूरी होने के बाद उसे डिटेंशन सेंटर भेजा गया था।
2025 में फिर केस, 2026 में हुई बरी
महिला के खिलाफ वर्ष 2025 में विदेशी अधिनियम के तहत एक और मामला दर्ज किया गया। हालांकि, वर्ष 2026 में अदालत ने उसे उस मामले में बरी कर दिया।
इसके बावजूद महिला के डिटेंशन सेंटर में रहने का मामला हाईकोर्ट के सामने पहुंचा। इसी दौरान महिला की ओर से डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए गए।
हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अब 15 अक्टूबर की सुनवाई में सरकार और केंद्र की ओर से रखे जाने वाले जवाब पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।












