
चाईबासा । झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा के जंगलों और पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ नेता असीम मंडल को गिरफ्तार कर लिया गया है। आकाश, तिमिर और मनोज जैसे कई नामों से पहचाने जाने वाले असीम मंडल पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने उसे पूर्व मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर इलाके से पकड़ा है।
दो बैग से साहित्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तारी के समय असीम मंडल के पास दो बैग थे। इनमें माओवादी साहित्य, पुस्तिकाएं और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं। जांच एजेंसियां बरामद सामग्री की पड़ताल कर उसके संपर्कों और हाल की गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
छात्र जीवन से वामपंथी गतिविधियों से जुड़ाव
करीब 64 वर्षीय असीम मंडल पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के फुलचक गांव का निवासी बताया गया है। वह छात्र जीवन में कट्टर वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और बाद में पीपुल्स वार ग्रुप में शामिल हो गया। उसने पश्चिम बंगाल के सारेंगा एवं गोआलतोड़ के साथ झारखंड के पूर्वी सिंहभूम स्थित गुराबंदा क्षेत्र में भी संगठन के लिए काम किया।
संगठन में संभालीं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
21 सितंबर 2004 को भाकपा (माओवादी) के गठन के बाद असीम मंडल जंगलमहल लौट आया। बताया जाता है कि संगठन का प्रभाव बढ़ाने में उसने अहम भूमिका निभाई और लालगढ़ आंदोलन के दौरान भी सक्रिय रहा। वर्ष 2010 में उसे पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी का सचिव बनाया गया। वह बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्रीय कमेटी में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुका है। माओवादी नेता किशनजी की मृत्यु के बाद असीम मंडल ने जंगलमहल छोड़ दिया और झारखंड के जंगलों में अपना ठिकाना बनाया। संगठन के कई सदस्यों के हालिया आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी तलाश तेज कर दी थी।
स्वास्थ्य बिगड़ा तो जंगल से निकला
पुलिस सूत्रों का कहना है कि बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण वह अगस्त के मध्य में जंगल छोड़कर निकल गया था। दावा किया गया है कि जाने से पहले उसने एक हथियार और कुछ दस्तावेज जंगल में छोड़ दिए थे। उसका अंगरक्षक मंगल और पत्नी मालती अभी कहां हैं, इसकी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले वह पहचान छिपाकर परिचितों और रिश्तेदारों के यहां लगातार ठिकाने बदल रहा था। यात्रा के खर्च के लिए एक परिचित से पैसे लेने पहुंचने के दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसकी गिरफ्तारी को बंगाल, झारखंड और ओडिशा में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।











