
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दो और भारतीय एलपीजी जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं, जिससे देश में गैस आपूर्ति को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ नाम के जहाज सोमवार सुबह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में पहुंच चुके हैं। हालांकि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इन जहाजों के सुरक्षित निकलने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।बताया जा रहा है कि इन जहाजों को आगे बढ़ने की मंजूरी ईरान की सुरक्षा एजेंसी Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC से मिली। सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में भारतीय नौसेना ने अहम भूमिका निभाई और ईरानी अधिकारियों से समन्वय कर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कराई।
इससे पहले ‘शिवालिक’ और ‘नंदा’ नाम के भारतीय जहाज एलपीजी लेकर देश पहुंच चुके हैं। वहीं विदेशी जहाजों की आवाजाही भी जारी है, जो संकेत देती है कि संकट के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को संतुलित करने में जुटा हुआ है।
रविवार को न्यू मंगलौर पोर्ट पर अमेरिका से एलपीजी लेकर ‘पिक्सिस पायनियर’ जहाज पहुंचा, जिसमें करीब 16 हजार टन गैस लाई गई। इससे पहले रूसी जहाज ‘एक्वा टाइटन’ भी यहां पहुंच चुका है।
उद्योग जगत की संस्था Confederation of Indian Industry यानी CII का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत की सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। कई सेक्टरों में कच्चे माल की कमी और देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, ईरान में फैसले लेने की प्रक्रिया हाल के घटनाक्रमों के बाद धीमी हो गई है, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। ऐसे में भारतीय नौसेना की सक्रियता और कूटनीतिक प्रयास काफी अहम साबित हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव के बीच भारत के लिए यह एक राहत भरी खबर है। लगातार आ रहे एलपीजी जहाजों से यह साफ है कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहा है।










