
जमशेदपुर: टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की आहट तेज हो गई है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वह फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में पद पर बने रहेंगे। उनके इस्तीफे के साथ ही टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
एन. चंद्रशेखरन करीब चार दशक से टाटा समूह से जुड़े रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1987 में टीसीएस से अपने करियर की शुरुआत की थी और लंबे समय तक समूह की अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद तक पहुंचे। वर्ष 2017 में उन्हें टाटा संस की कमान सौंपी गई थी। वह टाटा समूह के पहले गैर-पारसी चेयरमैन भी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के समय में टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए थे। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में चेयरमैन के भविष्य को लेकर ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। रतन टाटा के निधन के बाद समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं और तेज हुई थीं।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर फरवरी 2026 में टाटा संस के बोर्ड की बैठक में भी चर्चा हुई थी। बताया गया कि बैठक में उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव पर सभी सदस्यों की सहमति नहीं बनी। इसके बाद चंद्रशेखरन ने दोबारा नियुक्ति के फैसले से खुद को अलग रखने का निर्णय लिया।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और एयरलाइन कारोबार सहित कई क्षेत्रों में विस्तार किया। टाटा समूह की कंपनियों के बीच समन्वय बढ़ाने और नए कारोबार में निवेश को लेकर भी उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले हुए।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरवरी 2027 के बाद टाटा संस की कमान किसे सौंपी जाएगी। नए चेयरमैन का चयन टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के लिए महत्वपूर्ण फैसला होगा। माना जा रहा है कि उत्तराधिकारी को लेकर आने वाले महीनों में समूह के भीतर व्यापक विचार-विमर्श हो सकता है।

