
नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत और कश्मीर का मुद्दा उठाया। अपने संबोधन में उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों का बचाव करते हुए कई ऐसे दावे किए, जिन पर भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान को शांति समर्थक देश के रूप में पेश करने की कोशिश भी की।
कश्मीर को बताया पाकिस्तान की ‘जीवन-रेखा’
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर को पाकिस्तान की ‘जुगुलर वेन’ यानी जीवन-रेखा बताते हुए कहा कि उनका देश कश्मीरियों को राजनीतिक, राजनयिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा। उन्होंने दावा किया कि यह समर्थन तब तक जारी रहेगा, जब तक कश्मीरियों को आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं मिल जाता। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान को मिलने वाले पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख मोड़ने के किसी भी प्रयास को उनका देश गंभीरता से देखेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।
भारत पर लगाए गंभीर आरोप
अपने भाषण के दौरान शहबाज शरीफ ने भारत पर पाकिस्तान के विरुद्ध कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि करीब एक वर्ष पहले पाकिस्तान को बाहरी हमले का सामना करना पड़ा था। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में पाकिस्तान की ओर से किए गए दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। उनके भाषण का बड़ा हिस्सा भारत और कश्मीर पर केंद्रित रहा। इससे एक बार फिर यह संकेत मिला कि पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर अपने आंतरिक और आर्थिक मुद्दों के बजाय कश्मीर के विषय को प्रमुखता देने की पुरानी रणनीति जारी रखे हुए है।
पाकिस्तानी सेना की तारीफ
शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान की सेना और वायुसेना की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी सेनाओं ने साहस और पेशेवर तरीके से जवाब दिया। उन्होंने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व की भी तारीफ की। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से दक्षिण एशिया में बड़ी संख्या में लोगों की जान बच सकी।
भारत दे सकता है कड़ा जवाब
शहबाज शरीफ के बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत की ओर से उत्तर दिए जाने की संभावना है। भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है और इससे जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की जाएगी। राजनयिक जानकारों के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर आरोप-प्रत्यारोप से दोनों देशों के संबंधों में तनाव और बढ़ सकता है। अब निगाहें भारत के आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं।











